म’हात्मा गाँ’धी और डॉ अ’म्बे’ड’कर दोनों इतने प्र’भा’वि’त थे इ’मा’म हु’सै’न से , प’ढ़’कर है’रा’न रह जाओगे

इ’माम हु’सैन जिनकी याद में मो’हर्र’म मनाया जाता है। जो कि मो’हर्र’म के महीने की उ’र्दू 10 तारीख को मनाया जाता है। इ’माम हु’सैन को क’र्ब’ला में श’ही’द किया गया था। इस दिन को आ’शू’रा का दिन भी कहा जाता है। इस दिन उनकी याद में जु’लू’स भी नि’का’ला जाता है। इस दिन के रो’जे रखने के बहुत ही ज्यादा स’वा’ब मिलता है। इ’मा’म हु’सै’न के बारे में गां’धी जी ने बहुत अच्छा बयान दिया था। आ’ज ह’म आ’प’को ‘उ’सी के बारे में ब’ता’एंगे।

जैसा कि आप सभी जानते है इ’मा’म हु’सै’न से लोगो ने बहुत रोशनी ली है। बा’तिल के खि’लाफ उ’ठ ख’ड़े होना ये हु’सै’न’ का त’रीका है। इसलिए गां’धी जी ने हिं’दुस्ता’न में ब’र्ता’नवी सा’म्रा’ज्य के खि’लाफ उठ खड़े हुए तो चं’द लोग उनके सा’थ थे । तो लोगो ने गां’धी जी से कहा इ’नती बड़ी हु’कू’म’त से आप ट’क’रा’एं’गे तो इतने कम लो’गो को ले जाना बे’अक्ल’बन्दी है। गां’धी ने कहा ये बात मैंने हु’सैन से सीखी है।

आप हु’सैन को ना’पीए म’त ना ही तो’लिए । दुनिया में अ’ल्ला’ह ने ऐसा त’रा’जू पै’दा ही नही किया । जिसमे हु’सै’न तो’ला जा सके। अ’ल्ला’ह ने दुनिया मे ऐसे अ’ल्फा’ज पै’दा ही नही किए जिसमे मु’कल्ल’म तौर पे हु’सैन की फ’जी’लत ना’पी जा सके। हु’सैन हु’सैन है। बस मौ’ला हु’सैन को सही तौर पर पे’श करने की जरूरत है। किसी मु’फ’क्की’र ने कहा था। इंसान को बे’दार तो हो लेने दो , हर कौ’म पु’का’रेगी हमारे है हु’सै’न ।

गाँ’धी जी की ही तरह संवि’धा’न नि’र्मा’ता आं’बे’ड’क’र ने भी इ’मा’म हु’सै’न के बारे में भी कहा ,आइये जानते है। डॉ’क्टर बा’बा अ’म्बे’ड’क’र ने कहा था मैं हु’सैन को खे’रा’त पेश करता हु। किसी ने कहा कि डॉ’क्ट’र सा’ह’ब हु’सै’न आपकी जा’त के तो न’हीं है फिर भी आप उनको खै’रा’त की बात करते है। डॉ’क्ट’र ने जबाब दिया कि हु’सै’न ने एक के खि’ला’फ अ’तिजा’त किया था और वो हु’कू’म’त वाला था।

की वो फू’फी से नि’का’ह करता था। और सौ’ते’ली माँ को अपने ह’र’म में रखता था। सौ’ते’ली ब’ह’न के नि’काह को जा’य’ज समझता था। अगर हु’सै’न क’र्ब’ला में न आते तो हमारी फू’फी की जिंदगी ख’त’रे में प’ड़ जाती। हमारी सौ’ते’ली माँ की आ’ब’रू भी ख’त’रे में पड़ जाती है। हु’सै’न ने क’र्ब’ला में जाकर के इ’स्ला’म ही नही ब’चा’या है। बल्कि क’र्ब’ला में जाकर हर एक ‘बेटी की का’यना’त भी ब’चा’ई है। ये मौ’ला हु’सैन का कि’र’दा’र है।

जो कु’रान की आ’यत का जिक्र करेंगे उनको मौ’ला हु’सैन का कि’र’दार समझ में आ जा;ए’गा। ह;’ज’र’त अ’ब्बा’स कहते है अ’ल्ला’ह ने फरमाया की मैं क’या’म’त के दिन न इन के बारे में पु छू गा ने’अ’म’त के बारे में। इन से मु’रा’द है कि अ’ल्ला’ह क’या’म’त के दिन ह’ज’र’त अ’ली और औ’लादे अ’ली के हक के बारे में पूछेगा की तु’म’ने इ’न’का ह’क क्या नि’भा’या है।

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