कृषि कानूनों को लेकर सच साबित हुआ किसानों का डर! हिमाचल में अडानी के तय किए रेट से सेब बागवानों में नाराजगी

पिछले साल संसद से पा’रित हुए कृ’षि का’नून को लेकर कि’सा’नों के मन मे जो आशं’का थी वह अब स’च्चाई का रूप भी लेने लगी है। दरअसल, कि’सान इस बात को लेकर आं’दोल’न में थे कि अगर सरकार कृ’षि का’नून लागू कर देती है तो इससे कि’सान बड़े कॉरपो’रेट घरा’नों के भ’रोसे रह भी जाएंगे ।

इस बात पर भारतीय कि’सान यूनि’यन के नेता राकेश टिकेट ने एक बयान जारी भी किया था। राकेश टि’कैत ने जो आ’शंका जताई थी वह हि’माचल प्रदेश की हकी’कत की शक्ल भी ले चुकी है। दरअसल सेव की खरीद करने हिमा’चल आई अडानी एग्री कम्पनी फ्रेश से बाग’वानी पर जो’र का झट’का भी लगा है।

adani agri fresh himachal

कम्पनी ने जो रेट तय की है उसे सुनकर बागवानों में बहुत ही ज्यादा ना’रा’जगी भी है।बता दे कि।पिछले साल के मुकाबले में इस बार प्र’तिकिलो के हिसाब से 16 रुपए तय कीमत भी तय की गई है।कम्पनी हाल ही सेसेब की खरी’दारी भी शरु की है। इस बीच क’म्पनी ने बीते दिनों ही सेब खरी’द

मूल्य की घोषणा को भी तय किया है। अडानी एग्री फ्रेश अस्सी से 100 फ़ीसदी रंग वाला एक्सरर लार्ज सेब 52 रूपए प्रति किलो जबकि लार्ज, मी’डियम और स्मॉ’ल सेब 72 रूपए प्रति किलो की दर पर खरीदेगी। वही बीते साल यह ए’क्स्ट्रा सेब 68 जबकि

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मिडियम और स्मॉल सेब 88 रूपए प्रति किलो तय किया गया था। 60 फीसदी से कम रंग वाले सेब की खरीद 15 रूपए प्रति किलो की कीमत पर होगी। बीते साल ऐसा सेब 20 रुपए किलो खरी’दा गया था।

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