अकबर के गवर्नर अब्दुर्रहमान ने 400 साल पहले बनवाई थी ये जामा म’स्जिद, अरबी में …

हमारे देश मे बहुत सी ऐसी खुबसूरत इमारते है जो बरसो पहले बनकर तैयार हो चुकी थी। हमारे देश मे पहले बा’दशाहों की हुकूमत चला करती थी। बादशा’ह एक देश से दूसरे देश को घूम’ने जाया करते थे या नए दे’श की खो’ज करते थे या फिर जं’ग करके उस जगह को फत’ह करते थे । जब कोई भी बाद’शाह कही पर आता था वो उस जगह पर बेह”तरीन इमारतों की तामीर करवाते थे जो दुनिया के लिए एक अजू’बा ही कही जाती थी और है।

हमारे देश मे ऐसे कई बाद’शाह हुए है जिन्होंने ऐसी इमा’रतें खड़ी की है वह आ’ज भी वह दुनिया के लिए आश्चर्य’जनक ही लगती है। उन्होंने बेहतरीन इमारतें ही नही , इबतगाहे और घर भी बेहतरीन निर्माण किए थे। उन इमारतों पर , इबतगाहो पर नक्काशियां की आज भी दुनिया दीवानी है। जैसा कि आप सबको मालूम है कि इस्ला’म धर्म’ को मानने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग हर मोहल्ले , कस्बे, राज्य में नमा’ज अ’दा करने के लिए म’स्जि’दे बनाते है।

जहां पर (म’स्जिद) में मुस्लि’म समु’दाय के लोग न’माज अदा करते है । आज हम आपको बताने जा रहे है कि लखनऊ की शान कहलाने वाली जामा म’स्जिद को कि’सने बन’वाया था। नादान महल रोड पर बनी यह जा’मा म”स्जिद की तामीर लगभग 400 बरस पहले हुई थी। बादशाह अ’कबर की रियासत में गवर्नर रहे शेख अब्दुलरहिम ने इसका निर्मा’ण करवाया था। इस म’स्जि’द में दूर दूर से न’माजी आकर नमा’ज अदा करते है।

पिछले 20 सालों से अधिक समय से इस म’स्जि’द की देखरेख कर रहे बदरुद्दीन बताते है कि लखनऊ में बादशाही दौर की यह सबसे पुरानी म’स्जि’दों में से यह एक है। मुगलों के दौर में लखनऊ में कोई जामा म’स्जिद न होने की वजह से इस म’स्जिद की तामीर की गई थी। उनकी मौ”त के बाद म’स्जि’द के सहन के बाहर उन्हें द’फ’न किया गया है। जहाँ पर अभी भी मकबरा बना हुआ है। इनके पास में ही इनकी प’त्नी की भी क’ब्र है।

उन्होंने बताया है कि जब बादशाह अकबर ने शेख अब्दुलरहिम को यहां की रियासत सोंपी तो उन्होंने लखनऊ को ही अपना कायम बना लिया था। म’स्जि’द पर बनी नक्काशी अब धुंद’ली हो गई है। लेकिन अरबी में आयतें साफ़ लिखी हुई दिखाई देती है। इस म’स्जिद में ई’द और ब’करी’द की न’मा’ज के अलावा भी लाखों संख्या में न’मा’जी न’मा’ज अदा करते है। यह म’स्जि’द बहुत बड़े इलाके में फै’ली हुई है। छोटा इमामबाड़ा के पीछे ही हुसैनाबाद इलाके में बनी यह म’स्जि’द है। लखनऊ की जा’मा म’स्जि’द एक चबूतरे पर लखोरी ईंटो और चुने से बनाई गई है।

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