अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के सुलेमान हॉल में छिपा है रोचक इतिहास, जानकर हो जायेगे हैरान

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी देश की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटियों में से एक है। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हजारों छात्र देश में ही विदेश में भी अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरते रहे है । आइए जानते है इस यूनिवर्सिटी के शाह सुलेमान हॉल के बारे में।

इसकी स्थापना 1802 में एक फ्रांसीसी उपनिेशवादियों से हुई थी। इस हाल का नाम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति शाह सुले मान के नाम पर रखा गया था। वो इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पहले भारतीय मुख्य न्यायदिश भी रहे है। सुलेमान का जन्म 3 फ़रवरी1886 में हुआ था।

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इनकी प्रारम्भिक शिक्षा जोनपुर और मुईर कॉलेज, इलाहबाद में हुई थी। 1906 में इनको एक राज्य यूरोपीय छात्रवृति से सम्मानित भी किया गया था। इसके बाद वी इंग्लैंड चले गए थे। 1911 में इंग्लैंड से लौटने के बाद सुलेमना इलाहाबाद में शमिल हुए। सुलेमान ए एम यू के कुलपति भी रहे है।

इस हॉल कि स्थापना 1945 में हुई थी। इनमे आगा खान छत्रावस, भोपाल हाउस, जयकिशन दास, हसरत मोहानी, कश्मीर हाउस, महमूदाबाद हाउस भी शमिल है। सर सैयद से जयकिशन कि गहरी दोस्ती थी। ए एम यू के इतिहास के जानकर डा राहत अबरार के अनुसार सुलेमान हॉल कभी पैरो हाउस था।

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जो एक फ्रांसीसी नागरिक था। टब्बिया हॉल कि स्थापना भी इसी हॉल मै हुई थी। यह हॉल काफी बड़ा है और इसकी सुंदरता भी बहुत शानदार है। इस यूनिवर्सिटी की यह हॉल काफी पहचान भी बना चुका है।

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