स्कूल में बच्चों ने गाया इक़बाल का “लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी’, प्रिंसिपल हुआ नि’लंबित

अल्लामा इकबाल के नाम से प्रसिद्ध नज़्म अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने 1902 में ‘लब पे आती है दुआ बनके’ लिखी थी। इसके बाद उन्होंने ‘सारे जहाँ से अच्छा’ बेह तरीन तराना भी लिख चुके है। इनके गीतों में अलग ही लय और रास होती हैं। एक मामला हमारे सामने आता है, जहां पर सिर्फ हेडमास्टर को ह’टा दिया गया कि वो सुबह छात्रों से लब पे आती है दुआ गाते थे। आपको बता दे, अल्लामा इक़बाल ने कई कौमी तराने भी देश को दिए है ।

और अल्लामा इक़बाल के बारे में कहा जाता है उनके दादा कश्मीरी पंडित थे । जो बाद सियालकोट चले गए थे । उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक सरकारी स्कूल का मामला है। जहां पर हेडमास्टर को ब:जरं-ग द:ल और वि’श्व हिं:दू परि:ष:द के शिकायत पर नि’लं’बि:त कर दिया गया है। इस पर संग’ठ:न ने आ:रो’प लगाया है कि ये रा:ष्टगा-न नही करवाते है।

रिपोर्ट की अनुसार, वि’हि’प की शि’का’यत ब्लॉ’क शि’क्षा अधि’का’री उपें’द्र कु’मार ने जां’च शुरू कर दी है। जांच में पाया गया कि स्कूल में बच्चे सुबह की प्रा’थ’ना में अक्सर यही क’वि’ता गाते थे। नि:लं’बि’त शिक्षक फुरकान अली ने हालांकि आ’रो”पो को खा”रिज किया है। उन्होंने कहा कि छात्र लगातार राष्ट्रगान गाते करते है और इकबाल की कविता कक्षा एक से आठ तक उर्दू पा’ठ्यक्र’म का हिस्सा है।

जो कि कोर्स के अनुसार है। उनका कहना है कि ब’ज”रंग द’ल और वि”हि’प यु’वा” ‘वा’हि’नी का’र्यकर्ताओ ने मुझे निकालने की मांग की है। इसके बाद उन्होंने स्कूल और कलेक्टर के बाहर वि’रो’ध किया है। मैंने सिर्फ वह कविता पढ़ाई है जो पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। अल्लामा इक़बाल को उर्दू और फ़ारसी का आधुनिक काल का सर्वक्षेष्ठ शायर माना जाता है और उनकी शायरी काफी ऊंचे दर्जे की मानी जाती है ।

इक़बाल की प्रमुख रचनाओं में असरार ए खुदी, रमुज ए बेखुदी, बंग ए दरा और तराना ए हिन्द प्रमुख है । इक़बाल ने राजनीतिक और धा’र्मिक दोनों ही तरह से लिखा है । आपको बता दे, अल्लामा इक़बाल ने देश की आज़ादी से पहले तराना ए हिन्द लिखा। जिसके बोल है – सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा। अल्लामा के इस नज़म में ‘हिंदी है हम वतन के’ देशभक्ति और प्रेरणा को दिखाता है।

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