अमेरिका में इस मुस्लिम महिला ने रचा इतिहास, ऐसा करने वाली पहली महिला बनी,जानिए

गजाला हाशमी भारत के हैदराबाद में पैदा हुई थी।लेकिन जब यह 4 साल की थी तभी इन्होंने भारत को छोड़ के चली गई। 4 साल की उम्र में अमेरिका में प्रवास किया। बचपन मे इनको घर वाले मुन्नी कहकर बुलाते थे। गजाला ने जॉर्जिया दक्षिणी यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री हासिल करने के बाद इमोरी यूनिवर्सिटी से उन्होंने पीएचडी की। 1991 में हाशमी और उनके पति अजहर रिचमंड में शिफ्ट हो गए थे।

Literacture की पूर्व प्रोफेसर ओर सामुदायिक कॉलेज की प्रशासक गजाला हाशमी ने चुनावो में शिक्षा, बन्दूको पर कंट्रोल और स्वास्थ्य सेवाए सुधारने को मुद्दा बनाया। वर्जिनिया की पहली मुस्लिम महिला सीनेटर बनने से वह खुश है। आपको बता दे कि 55 वर्षीय गजाला हाशमी को अमेरिका से बाहर निकाले जाने का ड’र स’ताने लगा था।

2017 में अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक घोषणा क़री थी कि वह कुछ मु’स्लिम देशों के श’रणार्थियों पर बै’न लगाने वाले है। वह सोचने में मजबूर हो गई थी कि अब क्या होगा? जिस देश मे पूरी जिंदगी को गुजारा अब छोड़ के जाना पड़ेगा। लेकिन उनकी सभी शं’काए दूर हो गई। उनको बहुत ही राहत मिली है। इनको जनता ने पहली सीनेटर के रूप में चुना है।

बता दे, अमेरिका में सीनेटर बनने पर गजाला को पूरी दुनिया से बधाई संदेश मिल रहे है । गजाला की इस कामयाबी पर कई मुस्लिम संगठनों ने उनको सपोर्ट करते हुए लिखा कि वह पूरी तरह से उनके साथ ही । कई संगठनों और उनके समर्थकों की दिन रात मेहनत के बाद उन्हें कामयाबी मिली है, इस बात को लेकर भी गजाला उत्साहित है कि लोगों ने उन पर पूरी तरह से भरोसा किया। गज़ाला को आप भी बधाई दे।

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