आमिर पीरजादा: बीबीसी का वह कश्मीरी पत्रकार जिसकी रिपोर्टिंग के रवीश ने पढ़े कसीदे

आमिर पीरजादा की यह रिपोर्ट न केवल क’श्मी’र के लिए भी देख सकते है औऱ इसे टीवी की पत्र’का’रिता में बचे कुछ अवशे’षो में रूप में देख सकते है। इस रिपोर्ट को देख कर पता चलता है कि इसके लिए विजु’अल तैयार करने में

कितनी मेहनत लगी होगी। जब से कै’मरे की जगह मो’बाइल फोन और मोजो से शूटिंग शुरू हुई है। विजुअल में कुछ और दिखता है लेकिन कहानी नही होती है। इसलिए मैने कहा है कि यह रिपोर्ट अव् शे’ष की तरह है। जैसे आखिर में कुछ ब’चा रह गया हो।

मोबा’इल फ़ोन के कैमरे ने टीबी पत्रका’रि’ता से टी’वी को ख’त्म कर दिया। बजट तो बचने लगा लेकिन बज’ट का बच’ना या बचा’ना आज तक जारी है। रवीश कुमार ने आगे उनके कसी’दे पढ़ते हुए बताया है कि ठीक उसी तरह से

जैसे डि’बेट के नाम और स्टार एंकर का सिस्टम आया। रिपो’र्टर ख’त्म हो गए। अब रि’पोर्टिंग ख’त्म हो रह है। मोबाइल के फोन से अब कुछ विजुअल तो मिल जाता है लेकिन बिना कै’मरा में के शू’ट किए गए इन विजु’अल में कु’छ हो’ता न’ही। एका’ध बार तु’क्का लग जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि मैं पत्र’का’रिता के छात्रों से सिर्फ यही कहूंगा कि जब आप लो’केशन पर हो तो अपनी क’हानी के रूप’कों के सौदंर्य में नही बदले। पीरजा’दा के कैमरा सहयोगि’यों ने कमाल का फन दिखा’ते हुए अपनी स्टोरी के विजु’अल को सौदंर्य की चम’क से काफी हद तक बचाया भी है।

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