सर सैयद अहमद ने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैरों में बांधा था घुंघरू, किया था नाटक का मंचन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बारे में आप लोगो ने सुना होगम इस यूनिवर्सिटी को कायम करने में सर सैयद अहमद खान का बहुत बड़ा रोलरहा है। उस वक्त की बात जब अलीगढ़ की राजकीय प्रौद्योगिकी और कृषि प्रदर्शनी में भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक ने पैरों में घुंघुरू बांध कर नाट्य किया था।

उस वक्त कट्टरपंथी विचारधारा के लोग को यह बात पसन्द नही आई इसलिए उन्होंने इस बात की आलोचना की थी।AMU के इतिहाज़ में डॉक्टर राहत अबरार कहते है कि दस्तावेजों के जिक्र में इस बात का जिक्र मिलता है किसर सैयद अहमद को 6 फरवरी 1894 को अपने साथियों के साथ नाट्य का मंचन किया था।

जो उस वक्त जागरूकता फैलाने और शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर्ड दिया गया थाएक जगह पर लिखा है कि लोग हमें थिएयरवाला कहकर हमारा मजाक उड़ाएंगे जो हमारे खिलाफ अखबारों में लिखते है।वह हमारा मजक बनाएंगे।सर सैयद कहते है कि अगर मैं लोगो का ख्याल करता तो अब तक जो

कुछ पाया हूं वह भी नही कर पाता। जो बकते है उनकी बक वास करने दो उनकी परवाह क्या करनी।इसके बाद थिएटर की तैयारी शुरू हो गई।हार मोनियम पर धनु बाबू फिदा हुसैन ने बजानी शुरी की और धीरे धीरे लोगो का आना शुरू हो गया ।

एक कर के एक 12 सिपाही मंच पर आए। सर सैयद दूसरे सीन में अरबी चोगा पहने हुए मंच पर नजर आए और कप्तान ने उनसेकुछ बातें की।इस तरह सेर सैयद की मेहनत और लगन से एक कामयाब मनचं खत्म हुआ।

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