पहली बार ये मु’स्लिम देश रखने जा रहा मंगल ग्रह पर कदम, 800 साल पहले मु’स्लिम वैज्ञानिक द्वारा खोज हुई आज सत्य, जानिए

स’ऊदी अरब लगातार दुनिया में विकास के पहिये को बढ़ा’ता हुआ च’ल रहा है, सऊदी ते’ल के साथ साथ बाकी चीज़ो में भी दुनिया से आगे ब’ढ़ने में लगा हुआ है । सऊदी मिशन 30 के तहत मंगल ग्रह के लिए पहला अरब अंतरिक्ष अभियान शुरू होगा। यह मंगल ग्रह तक पहुँचने में 49.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी को तय करेगा औऱ इसके लिए करीब 7 सप्ताह का समय लगेगा। यह बाद में मंगल ग्रह के आस पास चक्कर लगाएगा।

मंगल ग्रह सूर्य से चौथा औऱ सातवाँ बड़ा ग्रह है। इसकी सूर्य से औसत दूरी लगभग 22 करोड़ 79 लाख किलोमीटर है। इसको लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद यह मंगल ग्रह के पर्यावरण औऱ वातावरण के हिसाब से पृथ्वी पर भेजना शुरू करेगा। मंगल के कक्षा की एक परिक्रमा करने में इसको 55 घण्टो का समय लगेगा। सऊदी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार एक प्रेस कांफ्रेंस हुए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम के निदेशक साराह अल अमीरी ने कहा है कि यह परियोजना युवा अरब बैज्ञानिको को जो स्पेस इंजीनियरिंग में अपना भविष्य और लक्ष्य बनाना चाहते है उनके लिए है।बता दे कि आशा नामक यह उपग्रह जापान के तानेगशिमा से 14 जुलाई 2020 को लॉन्च किया जाएगा। जापानी रॉकेट इसको लेकर जाएगा। इसमें मंगल के वातावरण का आंकलन करने के लिए तीन प्रकार के सेंसर है।

जिंसमे ग्रह की धूलऔऱ ओजोन को मापने के लिए हाई रिजोल्यूशन मल्टीब्रांड कैमरा है। दूसरा इसमे इंफ्रारेड स्पेक्टमीटरहै जिसे एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटीने तैयार किया है। तीसरा सेंसर एक अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोमीटर है जो ऑक्सीजन औऱ हाइड्रोजन के स्तर को भी नापेगा।ब्रिटेन के रहने वाले साइंस म्यूजियम ग्रुप के निदेशक सर इयान कहते है कि बहुत सारे अंतरिक्ष अभियानों के ध्यान इसी की ओर है।

लकिन यह मंगल ग्रह की जलवायू की व्यापके औऱ पूरी तस्वीर पेश करेगा। बता दे कि अंतरिक्ष अभियानों में सँयुक अरब अमीरात का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। अंतरिक्ष मे जाने वाले पहले अरब अंतरिक्षसऊदी अरब के प्रिंससुल्तान बिनसलमान अल सऊद थे, जो 1985 में अमेरिका के अंतरिक्ष यान भी थे। यूएई का मानना है कि वो 2117 तक मंगल पर मानव बस्ती को बसाएगा।

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