दो मुस्लिम बहनों ने 300 रूपये में शुरू किया बिजनिस, अब 3 लाख रू कमा रही, 6 देशों से आते है ऑर्डर

काम करने के लिए ल’ग्न और मगन कि जरुरत होती है कोई काम छोटा या बड़ा नही होता है। हर काम को रुचि के अनुसार और अपने शौ’क के अनुसार किया जाता है।उत्तरप्र’देश कि रहने वाली मुस्लि’म समा’ज से ताल्लु’क रखने वाली दो बहनों से चार सालो से तीन सो रुपए कि लागत से ऑनलाइ’न सैंड’ल बेचने का काम शुरू किया।

आज उन’का यही का’रो’बार भार’त समेत 15 देशों में फैल चुका है। इतना ही नहीं उनकी बनी हुई सैं’ड’ल को कई से’लिब्रि’टी भी देख रही है। उनके पास हर महीने सौ से ज्यादा ऑर्ड’र आते है। इससे दोनों बहनों हर साल तीन लाख रुपए कि कमा’ई हो जाती है।27 साल कि नाजिश मीडिया से बात करते हुए बताती’ है कि हमारे घ’र कि स्थि’ति , आर्थिक बहुत अ’च्छी नहीं थी।

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मेरे पापा सु’ई धा’गे कि दुका’न चलाते थे। लेकिन उन्होंने ह’मारी पढ़ाई पर पूरा फो’कस दिया। ना’जिश प’ड़ने में अच्छी थी वो आगे जाकर अका’उंट, बैं’क ऑर्फि’स को बनाना चाहती थी। लेकिन 2016में उनको उनके भाई ने एक ऑ’नलाइन बिज’नेस के बारे में बताया।

भाई ने बताया की आगे आने वाले टाइम मै ऑ’नलाइन बिज’नेस को काफी ज्यादा ग्रो’थ मिलने वाली है।ना”जिश बताती है कि हम लोग पहले भी घर पर चप्प’लों पर कारी’गरी करते थे। इसकी तारीफ हमारे आस पास वाले भी किया करते थे।

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हमने सोचा कि क्यों ना इस करिग्री को एक बिज’नेस के रूप में बदला जाए। मेरी और मे’री बह’न’ छो’टी बह’न इं’शा ने कोल्हापुरी डिजाइन को चुना क्योंकि हमारी तरफ इसी डिजा’इन कि काफी मांग है।

म’जिश ने सैं’डल कि फोटो इं’स्ट्राग्राम और पोस्ट कर दी। उसके चार महीने बाद उन’को ऑ’र्डर भी मिला।ना’जिश का इंस्ट्रा’ग्राम अका’उंट प्र Taking Toe के नाम से पेज भी बनाया है। जैसे जैसे वक्त बीत’ता गया उनका कारोबार बड़ता गया।।

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नाजि’श ने बताया कि हम लोग बाजार से को’ल्हा’पुरी सैं’डल खरी’दकर लाते है। डि’जाइन का अल सैंप’ल ते’यार कर लेते हैं और उसको बना’वट के हिसाब से अलग के देते है। जैसे कप’ड़ों पर डि’जाइन किया जाता है उसी तरह हम भी सैंड’ल ओर डिजा’इन करते है।

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