अधिकारी होते हुए डा. इकबाल मरीजों का करते है मुफ्त ईलाज, IAS, IPS अधिकारयों के लिए मिसाल बने डाॅ इकबाल

जनता की मदद औऱ सेवा करने के लिए दी जाने वालों कुर्सी को पाकर कई अधिकारी जनता से ही दूरियां बना लेते है। लेकिन आज भी ऐसे कई अधिकारी है जो जनता की सेवा करने को ही अपना फर्ज समझते है। आज इंसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर तरह की भाग दौड़ में लगा रहता है। उत्तराखंड में अधिकारी मौजूद है जो सबका ध्यान अपनी और खींच रहे है।

चंपावत जिले के DM रहे डॉक्टर इकबाल अहमद एक ऐसे इंसान है जो अपने ड्यूटी से फ्री होकर सरकारी अ;सप्ताल में बैठकर मरीजो का इलाज करने में जुटे हुए है।डॉक्टर अहमद को जब भी वक्त मिलता है वो ड्यू’टी के बाद लोगो के इलाज में जुट जाते है। अहमद किसी से भी एक रुपया नही लेते है और दिन रात जनता की मदद करने के लिए रहते है।

dr ahmad iqbal news

बता दे, जिलाधिकारी एक डॉक्टर भी है। 2009 में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज बेंगलोर मणिपुर यूनिवर्सिटी से उन्हीने एमबीबीएस की है। जिले के ही मुखिया खूद ही जिलों के मरीजो की देखभाल करते है।अहमद इकबाल का जन्म एक साधारण से किसान परिवार में हुआ था। पिता इ’कबाल ने और माँ ने भी शुरू से ही अपनी जिंदगी को गरीबी में ही गुजारा था।

अहमद ने कानपूर से ही इंटर’मीडिएट की पढ़ाई पूरी होने के बाद 2009 में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज मैंगलोर मणिपुर यूनि’वर्सिटी से एमबी’बीएस की। 2010 में उन्होंनेसिविल सर्विसेज को परीक्षा पास की जो बहुत ही एक कठि’न परी’क्षा है। 2011 में वो सेना में आ गए।अहमद ने क्या कहा पर की अपनी नोकरी’चमोली, कर्णप्र’याग में एसडीएम रहे। इसके बाद रानीखेत में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रहे।

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अल्मोड़ा और टिहरी में सीडीओ का कार्य भी सम्भला। इसके बाद 1 जून 2016 को पहली बार चंपावत में उन्होंने जिलाधिकारी का कार्य भी सम्भला । 1 जून 2016 को चंपावत के डीएम बने डॉ अहमद इकबाल अब शासन में अपारसचिवके रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे।

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