प्यारे न”बी सल्लाहु अ’लैहि व’सल्लम की इन प्यारी बातों को नहीं जानते होंगे आप, य’मन में दिखता है खुबसूरत नज़ारा

मु’स्लिम ध’र्म में इस्ला’मिक कैलेंडर के हिसाब से त्यौहार मनाया जाता है। मु’स्लिम ध’र्म में रबीउल अव्व’ल महीने में आखिरी पै’गम्बर हज़रत मु’हम्मद सल्ला’हु अ’लैहि का जन्मदिन मनाया जाता है। इसे बारह रबीउल अव्वल के नाम से जाना जाता है। यह देश मे ही नही बल्कि पूरे विश्व मे बड़ी धूमधाम से इ’स्लामिक ध’र्म के अनुसार मनाया जाता है । बता दे, इ’स्लामि’क कैलेंडर के तीसरे महीने के रबी’उल अव्वल के 12 वे दीन ईद ये मी’लाद उन नबी बनाया जाता है।

इस दिन पैगम्बर मोहम्मद के जन्मदिन के मौके पर यह सेलीब्रेट किया जाता है। आज हम ईद ये मीलाद के मौके पर पैगम्बर के मौके जन्मदीन से जुड़ी कुछ बाते बताने जा रहे है। जो शायद आप नही जानते होंगे। पैगम्बर मोहमद इस्लाम के सब से महान नबी और आखिरी पैगम्बर है। उनके जन्म दिन के मौके पर कहा जाता है की उनका जन्म 570 ईस्वी में सऊदी अरब के शहर में मक्का में हुआ है। वे मक्का के रहने वाले है इनके पिता का नाम अब्दुल्ला था और माता का नाम बीबी आमीना था।

पैग’म्बर मोहम्म’द के बचपन में ही उनके पिता का इस दुनिया से कूच कर गए जबकि आपकी उम्र तकरीबन 15 साल थी तब आपकी माँ का भी इनतेकाल हो गया था। बता दे, पैग’म्बर मुह’म्मद सल्लाहु अलैहि वस्स’लाम का लालन पालन दाई हलीमा ने बड़े ही प्यार से किया । बता दे, हज़रत मुह’म्मद सल्ला’हु अलैहि’ वस्स’लाम ने अपनी जिंदगी में कभी झू’ठ नही बोला । इसके अलावा वह पूरी दुनिया के लोगों के लिए कई बेहतरीन नि’ज़ाम बनाकर गए जो आज भी एक मिसाल है ।

1400 साल में दौर में कई नामचीन हस्तियों ने जन्म लिया जिन्होंने पैग़’म्बर स’ल्लाहु अ’लेही वस्स’लाम की शिक्षा को सबसे उत्तम पाया । उन्होंने मर्द, औरत , बच्चे और हर फर्द के लिए ऐसा निज़ाम दिया जो रहती दुनिया तक इंशालल्लाह रहेगा । एक हदीस है कि हज़रत पै’गम्बर मो’हम्मद सल्ला’हु अ’लैहि वस्स’लाम की बीवी आइ”शा र’ज़ियल्लाहु अन्हु फरमाती है कि घर के काम मे मदद करते थे । इनके बाद वे नमाज़ पढ़ने के लिए वे बाहर जाते थे । वे बकरियों का दूध भी दुहते थे ।

आपको बता दे, यमन में दुनिया का सबसे बड़ा ईद मिलाद उन नबी पर जुलुस निकलता है। यहां पर आशिक ए रसूल लाखों की एक जगह इकट्टा होकर नात ए कलाम पेश करते है। इ’स्लामिक कैलेंडर हिजरी की भी शुरुआत हुई आपको बता दे कि उन्होंने एक खु’तबे के दौरान कहा था कि अ’ल्लाह ने मुझे इस दुनिया मे संदेश देने के लिए भेजा है। जैसा कि इ’स्लाम धर्म’ के मानने वाले जानते है कि है कि काफी मेहनत के बाद कुछ सालों में कुछ और लोग इ’स्लाम ध’र्म लेकर आए । जब लोगों ने आपके अख़लाक़ , ईमानदारी और संदेश को लोगों तक पहुचाने लगे तो पै’गंबर मुहम्म’द के साथीयो की तादाद बढ़ती चली गई यह बाद में सहा’बी कहलाए ।

उन्होंने म’क्का लौटकर फतह हासिल की। और स’ऊदी अरब के मक्का में इ’स्लामिक धर्म से जुड़ी कई पवित्र चीज़ मिलती है, जिसमें म’स्जिद से लेकर हु’ज़ूर पा’क सल्ला’हु अले’ही वस्स’लम की कई नि’शा’नियों के अलावा काफ़ी सुकून भी मिलता है । मक्का में हर साल दुनिया भर से लाखो लोग ह’ज के लिए जाते है । भारत से भी हज के लिए हर साल लाखों लोग जाते है।अगर इस लेख में लिखने में हमसे कोई ग’लती हो गई तो मा’फ़ी चाहते है और इ’स्लाह की गु’जारिश।

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