अगर दुनिया के सारे मुसलमान ज़कात देने लगें तो दुनिया में कोई मुसलमान गरीब नहीं बचेगा- एर्दोगन

र’मजा’न के पाक महिना में क़ु’रआन का महीना भी कहा जाता है। इसी महिने में पैगम्बर मोह’म्मद स’ल्ला’हु अ’लैहि व’स्स’ल्लम के जरिये क़ु’र’आन को उ तारा गया था।रम’ज़ा’न में रो’जा नमाज और कु’रा’न की ति’ला’वत के साथ ही ज;का’त और फि’तरा देने का भी बहुत महत्व है।

ज’कात इ’स्ला’म के 5 अरकानो में से एक है। इ’स्ला’म के मु’ताबिक, जिस मु’सल’मान के पास भी इतना पैसा और स’म्पत्ति हो कि उसके अपने पूरे खर्च पर हो रहे है और वो किसी मदद करने की स्थिति में हो तो वह जकात दे सकता है।

गरी’बी के म’सीहा कहे जाने वाले तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगान ने कहा है कि अगर दुनिया के सारे मु’सल’मान जकात देने लगे तो दुनिया मे कोई मु’सल’मान कोई गरीब नही रहेगा,इ’स्ला’म मेर’मज़ा’न के पाक महीने में हर हेसियतमन्द मु’सल’मान पर ज’कात देने जरूरी बताया गया है।

आ’मदनी से पूरे साल में जो बचत होती है। उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरी’ब या ज’रूर’तमंद को दिया जाता है। जिसे जकात कहते है। अगर किसी मु’सल’मान के पास तमामं खर्च करने के बाद 100 रुपए बचते है। उसमे से 2.5 रूपये किसी गरीब को देना जरूरी होता है।

यू तो ज’कात पूरे साल भर ही दी जाती है। मु’स’ल’मान इस पूरे महीने में जकात देते है। असल मे ई’द से पहले इस ज’कात को दी जाती है। यह ज’का’त खा’सकर गरी’बो, विध’वा, महिला’ओ, अ ना’थ बच्चों और किसी बी’मार और कम’जोर व्यक्ति को दी जाती है।

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