ना’गरिकता का’नून के वि’रोध में उतरे 24 देशों के 150 से अधिक सांसद, स’रकार पर द’बाव , मा’र्च तक …

यू’रो’पीय सं’सद वह जगह है जहां पर दूसरे लो’कतां’त्रिक देशो के का’नू’नों पर चर्चा होती है। अब यू’रो’पीय सं’सद फिर चर्चा में है । यूरो’पीय संस’द में अब भारत के ना’गरि’कता कानू’न की चर्चा हो रही है। भा’रत का नाग’रिकता का’नून इतना ज्यादा बढ़ गया है कि यू’रोपी’य सं’सद के कई सदस्यों दलों ने इस का’नून पर बहस और संसद द्वारा प्रस्ता’व पास किए जाने को लेकर अपनी बात रखी ।

ना’गरि’कता का’नू’न भारत मे पिछले साल दिसम्बर में लागू किया गया था। जिसे लेकर देशभर में वि’रो’ध प्रदर्शन हो रहे है। इस कानू’न के खि’ला’फ भा’रत ही नही अपितू जापान, अमेरिका, सऊदी, फ्रांस, यूक्रेन, ब्रिटेन , न्यूजीलैंड आदि देशों ने भी इसका वि’रोध किया है। भा’रत सर’कार का कहना है कि नया कानू’न किसी की ना’गरि’कता नहीं छि’नता है। इसको पड़ोसी देशो में उत्पीड़न हुए अल्प”संख्य’क लोगो की र’क्षा करने और उन्हें ना’गरि’कता अ’धिकार देने के लिए लाया गया हैं।

बता दे, इस का’नून में मु’स्लिम स’माज को को बाहर रखा गया है।यू’रो’पीय सं’सद में सो’श’लिस्ट और डेमो’क्रेटि’क ग्रुप ने भारत के ना’गरि’कता का’नून को लेकर इसे भेद’भाव’पूर्ण और ख़’तरना’क रूप से बंट’वारा बताते हुए पेश किया है। यह का’नून के विरोध 24 देशों के 154 सां’सदों ने वोट किया । राज’नीतिक जान’कारों की माने तो इससे देश मे कई तरह के हा’लात और संक’ट पैदा हो सकते हैं।

सीएए के खि’लाफ पेश किए गए इस प्रस्ताव पर यूरो’पीय संस’द में बहस होनी और फिर मत’दान होने की प्रक्रिया जो 29, 30 जनवरी को होनी थी उसे अब मार्च तक टा’ल दिया गया है ।इसे भारत की बड़ी कू’ट’नी’तिक जी’त भी माना जा रहा है लेकिन अभी सं’कट ट’ला नही है।प्रस्ता’व में कहा गया है कि इस का’नून के तहत अमेरि’का देश ने भी समा’नता सुरक्षा के सिद्धांत पर सवाल किए थे।

यह प्रस्ताव में यूरोपी’य सं’घ जा”ति और धार्मि’क अल्पसंख्य’को के खि’लाफ़ भे’दभा’v के मुद्दे को शामिल करने का आह्वान करता है।प्रस्ताव इस बात को बताता है कि भारत देश ने अपनी श’रणार्थी नी’ति में ध’र्म के आधार पर यह किया गया है।CAA कानून भा’रतीय संवि’धान की धारा 14 का उल्लं’घन करता है।

इसके अलावा नाग’रिकता का’नून भारत के अंत’राष्ट्रीय दायि’त्वों का भी उल्लंघन करता है। इस कानून में जाति रंग, नस्ल, वंश, रा’ष्ट्रीय आदि के खि’लाफ भेदभा’व किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक यह कानून मानव के अधिकार और राजनीतिक स’म्बन्धो की भी आलो’चना करता है।नाग’रिकता का’नून से लोगो के सम्बं’ध में विश्व मे बड़ी परे’शानी पैदा हो सकती है।

बता दे कि हाल ही में मिली जान’कारी के मुताबिक, भार’त ने यू’रोपीय सं’सद से कहा कि यह हमारा आंतरि’क माम’ला है। संसद को ऐसी का’र्यवाही नही करनी चाहिए। जिससे लोक’तांत्रिक त’रीके से चुनी गई सर’कार के अ’धिकारों पर सवा’ल उठे।

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