न’बी ए क’रीम (स.अ.व.) को ये दो ची’जें बहु’त पसं’द थी, हर मो’मिन को ये जान’ना है जरु’री

अ’ल्ला’ह के ‘र’सू’ल स’ल्ल’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स’ल्ल’म को दो चीज दुनिया मे बहुत पसंद थी। जिसमें एक थी खु’श’बु लगाना और दूसरा नि’काह करना। इसके अलावा भी बहुत चीजे अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ल’हु अलै’हि व’स्स’ल’म को पसंद थी। लेकिन किसी चीज़ की तरफ र’ग़’ब’त न’हीं फ’र’मा’ई लेकिन इन दो चीज़ की तरफ र’ग़’ब’त फरमाई और हमेशा खु’श’बु का इस्तेमाल करते थे। अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स्स’ल’म को खु’श’बु इतना प’संद था कि आप स’ल्ला’हु’अ’लै’हि व’स्स’ल’म के पास तोह’फा भेजता तो आप इसे कभी र’द्द’ न’हीं फरमाते थे।

कि खु’श’बू को कभी र’द्द मत करो। क्योकि ये ज’न्न’त से नि;कली हुई है। इसके अलावा भी अगर कोई इंसान कोई दूसरा तो’ह’फा भे’ज’ता था तो उसे भी क”बू’ल फ़रमाते लेकिन उसे कभी अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स्स’ल’म अपने पा’स न’ही रखते थे। बल्कि उस लोगों मे त’क’सी’म करवा देते थे खा’ने की ची’ज होती तो ग’री’बों को दे देते थे। दूसरी किसी ची”जो को भी आप अपने पास क’भी न’हीं रखते थे। लेकिन जब कोई आप के पास खु’श’बु भे’जता तो उसे अपने पा’स रखते थे।

उसका इस्तेमाल फ”र’मा’ते थे अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला”हु’अ’लै’हि व’स्स’ल’म ने खु’श्बु’ को खु’द भी फ़”र’माया हैं। और दूसरे को भी खु’श’बु लगाने का हु’क्म दिया है। रि’वायत में आता हैं की अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स’ल’म ने फरमाया करते थे की म’र्दे की खु’श’बु ऐसे होनी चाहिए खुशबु फै’ले और रं’ग नजर ना आए और औ’र’तो के लिए वो ख’श’बू बेहतर है कि जिसकी खू’श’बू ना फै’ले और रं’ग नजर न आये।

अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला’हु अ’लै’हि w’a’s”sla’m ने जु’मा के दिन और ई’द के दिन के मौके पर ख़ु’सू’स’न खु’श’बु लगने का हुक्म फ़रमाया है। अ’ल्ला’ह के र’सू’ल स’ल्ला’ हु अलैहि वसल्ल’म खुद ऊ’द क”स्तू’री और रे’ह’न ना’मी खु’शबु का इस्तेमाल ज्यादा पसंद फरमाते थे।खु’श’बु के अलावा आपको नि’का’ह करने का ‘हु’क्म देते था। आप ने ग्यारह नि’का’ह किया था। नि’क़ा’ह के बारे में उ’ल’मा बयान फरमाते हैं ।

ज्यादातर नि’का’ह अ’ल्ला’ह के र’सु’ल स’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स्स’ल’म’ ने इसलिए किया ताकी लोगो को घ’रे’लू मा’म’ले का इ’ल्म हो जाए। अ’ल्ला’ह के र’सू’ल सल्ला’हु’अ लै’हि व’स्स’ल’म जिस तरह से घ’र के अं’दर रह’ते थे । वह बा’तें आप की बी’वि’यां बाद में लोगे से साम’ने बया’न फर’माती थी और लो’ग भी उसी तरह से जिं’द’गी गु’ज’र’ते थे। इससे मा’लूम हुआ कि हमें ख़ा’स”तौर पर जु’मे’ की न”मा’ज़ में अच्छी खु’श’बु वाला इ’त्र ल’गाकर जाना चाहिए। इसके अलावा हमें इसे रो’ज़ भी इस्ते’मा’ल कर सकते है।

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