दुनिया हमारी कामयाबी पर बात करें हिजाब पर नहीं, विश्व की चार मुस्लिम महिलाओं की कहानी

भारत देश मे हि’जा’ब को लेकर काफी ज्यादा वि’वाद चल रहा है। कर्नाटक के उडप्पी में शूरु हुआ यह वि’वाद अब जड़े पक’ड़ता हुआ जा रहा है। अब को’र्ट ने हि’जाब को बै’न कर दिया है। ऐसे मेंबयान आए है कि हि’ज़ा’ब तर’क्की की राह में रुका’वट है।

ऐसे में हम यहां विश्व की उन चार महि’लाओ की बारे में बता रहे हैजिनकी तर’क्की में हि’जाब कभी आ’ड़े नही आया है।1.तुर्की की कुबरा दगली की उम्र 25 साल है।वो ताइक्वांडो के freestyle duo poomse category की वर्ल्ड चेम्पियन है।

उन्हीने हेड्सकर्फ़ पहनकर प्रतिस्पर्धा करके महिलाओ और खेल के बारे में रू’ढ़ि’वादी को चु’नोतिदेने की शुरुआत की है।तुर्की के इ’स्ताम्बुल के कुबरा दगली ने साल 2016 के पेरू की लीमा में विश्व चेम्पियन के स्वर्ण पदक जीता था।

उनकी इस काम’याबी के पीछे हि’जाब आ’ड़े नही आया है।2.इंदिरा क्लाजो अमेरिका की मशहूर बास्केटबॉल प्लेयर है। उन्होंने साल 2015 में International Basketbaal Federation के जरिये मैच के दौरान हि’ज़ाब बै’न को लेकर एक मुहिम चलाई।

साल 2017 में Indiro Kaljo की जीत हुई। FIBA ने हिजा’ब पहनकर खेकने की इजाजत दे दी।साल 2013 -14 के आसपा महिला मु’स्लि’म बा’स्केटबॉल ख़िलाडीई इंदि’रा कल’जो ने हि’जा’ब पहनकर खेलने चुना। लेकिन ब्रेसि’याई अमेरिका ख़िलाडीई

ने जल्दी ही इस बात को महसूस किया कि वह यूरोप में पे’शेवर रूपसे नही खेल पाएगी क्योंकि बा’स्केटबॉल के आधि’कारिक खेलो के दौरान हिजा’ब,पग’ड़ी किसी को भीप्र’ति’बन्ध लगा दिया गया था।

ऐसे ही सोमला’इयै कि रहने वाली म’रियम नूर ने हि’ज़ा’ब में रहकर दिल की जरूरत को पूरा करने वाली एक स’र्जरी की शुरुआत की है। उन्होंने भी हिजाबी को आड़े नही आने दिया।

डॉक्टर हिना शा’हिद की जिक्र किए बिना यह बात मुक’मल न’ही हो सकती है। दरअसल भारत मे मी’डिया और सो’शल मी’डिया पर ब’हस हुई कि हि’जा’बी नही किताब दो। इनको साल 2017 में British Awards for Services to Medicine से भी नवाजा गया है।

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