अद्भुत :हि’न्दू-मु’स्लिम खाई के बीच इस गांव के मदरसे में हि’न्दू पढ़ रहे उ’र्दू और मु’स्लिम रट रहे सं’स्कृत श्लोक

जहा एक ओर देश में ना’गरिकता कानून के विरोध में हि’न्दू मु’स्लिम के बीच खाई पैदा नज़र आ रही है तो वही दूसरी ओर गोंडा जिले का वजीरगंज एक नई इबारत लिख रहा है। एनडीटीवी में छपी खबर के अनुसार यहां के एक मदरसे में हि’न्दू बच्चे उ’र्दू तालीम हासिल कर रहे है तो वही मुस्लि’म बच्चें कं’ठो से निकलने वाले संस्कृ’त श्लो’क याद कर रहे है ।

एनडीटीवी न्यूज़ के अनुसार यहां पर हि’न्दू बच्चों की संख्या भी काफी अच्छी तादाद में है ।विकास खंड के रसूलपुर में स्थित मदरसा गुल’शन ए बग’दाद हि’न्दू हो उर्दू और मुस्लि’मों को संस्कृ’त की शिक्षा देकर अपनी अलग ही पहचान बना रहा है। इस मदरसे में दो मौलाना जो दीनी पढ़ाते है जबकि 4 दुनियावी तालीम देते है इसमें राम सहाय वर्मा, नरेश बहादुर श्रीवास्तव शामिल है ।

मद’रसों का नाम लेते ही सभी सोचने लगते है कि यहां पर सिर्फ मु’स्लिम बच्चों को तालीम दी जाती है। हमारे आसपास के मदरसों में सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे पढ़ाई करते है लेकिन पश्चिम बंगाल के म’दरसों की बात करे तो आपको जानकर हैरानी होगी कि वहां पर बिना किसी भेदभाव के मुस्लि’म बच्चे ही नहीं हिन्दू बच्चे भी पढ़ाई करते है। आइये हम आपको बताये है कि मदर’सों में परीक्षा शुरू हो गई है। मद’रसा बो’र्ड की परीक्षा ने इस बार नया रिकॉड बनाया है।

इस परीक्षा में शामिल करीब 70 हजार विद्यार्थियों में से लगभग 18 फीसदी हि’न्दू ने अपनी परीक्षा दी है ।राज्य में स’रकारी सहायता प्राप्त 6,000 से ज्यादा मदरसे है। पश्चिम बंगाल मद’रसा शि’क्षा बोर्ड के अध्यक्ष अबु ताहेर ने बताया है कि बीते कुछ सालों में परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की तादात बढ़ रही है। अब यहां पर गैर मुस्लि’म छात्र भी दाखिला ले रहे है।

अबु ताहेर ने बताया है कि बांकुड़ा, पुरुलिया और बिरभुर जिलों में 4 सबसे बड़े मदरसे है। जहाँ पर मुस्लि’म छात्रों से तादाद हि’न्दू छा’त्रों की ज्यादा है। वो कहते है कि देश ही नही बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए बहुत अच्छी बात है कि यहां पर हिन्दू मु’स्लिम साथ साथ पड़ रहे है। जो लोग देश मे नफ’रत फै’लाने का का’म कर रहे है उनको नसीहत मि’लनी चाहिए, ये उनके लिए सबक है।

अभी भी हमारे देश मे एकता कायम है। बर्धमान जिले के एक म’दरसे में पड़ने वाली 14 साल की सेन कहती है कि हमारे साथ मदर’से में ध’र्म के आधार पर भेद’भाव नही होता है। आपकों बता दे, मदरसे को सिर्फ मुस्लि’म समु’दाय से ही जोड़कर देखा जाता है । मद’रसे में अच्छी रैंक से मुस्लि’म बच्चे ही नही वरन हिन्दू बच्चे भी कई राज्यो में पढ़ते है । बता दे, मदरसे के मायने ही पढ़ाई से रिलेटे’ड है ।

यहां पर कम खर्चो में बच्चों की अच्छी पढ़ाई की जाती है । यहां पर पढ़ाने वाले लोगों की सैलरी भी कम रहती है तो पढ़ने वाले बच्चों की फीस भी बहुत रहती है, जिससे अधिक संख्या में गरीब पढ़ते है । मदरसे से देश की जानी मानी हस्तियां निकली है, जिन्होंने देश का नाम ऊंचा किया है ।

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