“क’श्मीर मामले को न्या’य के आधार पर हल” करने वाले बयान से तु’र्की को होगा बड़ा नु’कसान, भारत ने …

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दो’गान जब पाकिस्तान दौरे पर गए तब से ही वो सुर्खिया बटौर रहे है । रजब तय्यब एर्दो’गन पाक में सालाना बैठक में हिस्सा लिया था, जहाँ पर दो’नों देशों के बीच कई तरह की डी’ल हुई थी । तु’र्की के राष्ट्र’पति ने पा’किस्ता’न की सं’सद में सँयु’क्त सत्र को सम्बंधित करते हुए कहा था कि कश्मी’र मुद्दे पर उन्होंने पा’किस्तान का खुलकर सम’र्थन किया था।

कश्मी’र मु’द्दे को लेकर भारत की ओर से एर्दो’गान को करारा जवाब भी मिला था। भारत सरकार का कहना है कि एर्दो’गान आंतरि’क माम’लो पर हस्त’क्षेप नही करे। बता दे कि भारत सरका’र ने तु’र्की के रा’जदूत को समन किया है और कड़ा वि’रोध द’र्ज’ किया। एर्दोगान ने कहा था कि तु’र्की’ कश्मी’र मुद्दे का तत्काल निकालने में भा’रत और पाकिस्ता’न की मदद करने के लिए तैयार है।

एर्दो’गान ने ये भी कहा कि कश्मीर मुद्दा जितना पाकि’स्तान के करीब है, उतना ही तुर्की के भी है। तु’र्की के लगातार भा’रत वि’रोधी रु’ख की वजह से मो’दी सरकार दूसरे सख्त कदम उठा सकती है। कूटनी’तिक सूत्रों का कहना है कि भारत तु’र्की कम्पनी TAIS के साथ 2.3 अरब डॉलर की डी’ल से पीछे हो सकता है।

बता दे कि इस डील से तुर्की कम्पनी भारतीय नोसेना के लिए 5 जहाज बनाने में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की मदद करने वाली है।TAIS ने प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाई थी। विदेश मंत्रालय रवीश कुमार ने बताया है कि इस तरह के बयान न तो इतिहास की समझ को बताते है और न ही कूट’नीति की।

उन्होंने बताया है कि भार’त ने तु’र्की के पाकि’स्तान द्वारा सिमा पार आ’तंक’वाद को सही ठहराने की को’शिशों को भी खारिज कर दिया है। तुर्की द्वारा पाक सदन में दिए बयान के बाद से ही भार’त नाराज़ आ रहा है। भारत ने तु’र्की को कहा है कि वो भारत के आं’तरिक मा’मलों में द’ख़ल नहीं दे।

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