भारत की पहली बर्फ मैराथन में “हिजाबी आयशा” ने जीता गोल्ड, देश भर से मिल रही है दुआएँ

हि जाब को लेकर कई जगहों पर विवाद देखा गया है। हाल ही में हि जाब में रहने वाली एक 27 वर्षीय आयशा ने लाहौल में10,500 फीट की ऊँचाई पर बर्फ से ढके हुए पहाड़ों में अपनी उपस्थिति को दर्ज किया है। हिमाचल प्रदेश के लाहौ ल घाटी के एक छोटे से शहर सि स्सूके हाल ही में

शून्य से कम तापमान पर आयोजित भारत की पहलीं स्रो मैराथन की शुरआत में अन्य उत्साही धावकों के बीच आयशा ने अपनी दमदार मोजू दगी को दर्ज किया है।आवाज दी वाइस की एकरिपोर्ट के मुताबिक बता दे कि आयशा मुम्बई में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।

जो उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु वाले केरल के सबसेउतरी जिले के कासरगोड की रहने वाली हैआयशा ने 47 मिंट में53 सेंकड में 5 किमी मैराथन पूरी करने के बाद महिला वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया है। इ स श्रेणी में सबसे तेज महिला पचलन में जन्मी 16 वर्षीय सृष्टि ठाकुर थी।

जिन्होंने 43 मिंट 21सेकंड का समय लक्ष्य पूरा किया। सृष्टि मनाली के पास एक गांव पचलन में पैदा हुई। वह मनाली के एक सरकारी स्कूल में ग्यारवहीँ कक्षा की छात्रा है। वह कहती है कि वह आयशा सेप्रभावित थी वह हिमाचल प्रदेश की उन प्रतिभागियों से बहुत आगे थी जो बर्फ में पली बढ़ी है।

हि ज़ाब के बारे में आयशा ने कहा है कि यह आपकी अपनी पसंद है अगर आप पहना चाहते है तो आप पहने अगर नही पहनना चाहते है तो आप नही पहने। यह व्यक्तिगत पसन्द का मामला है। मै हि जाबी पहनना पसंद करती हूं क्योंकि मै 6 साल की उम्र से पहन रही हूं।

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