मिलिए जां’बाज इशरत रशीद से, पहली वि’कलांग महिला अंतराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी बनी क’श्मीर की

इंसान चाहे सही सलामत हो लेकिन अगर उसमें कुछ करने का ज़ज़्बा न हो तो वह कुछ नहीं कर सकता है। अगर कोई जन्म से सही सलामत नहीं है यानि शरीर के किसी अंग(हाथ,पैर आदि) में वि’कृति लेकिन उसमें जज्बात है ,लड़ने का हौसला है तो वह ऐसा कुछ कर जाता है जो एक आम इंसान उसे करने की भी नहीं सोच सकता है। आपने दुनिया में ऐसे कई लोग दिख जायेगे जो आम इंसान के लिए प्रेरणा बन जाते है।

आज हम एक ऐसी की खबर से रूबरू कराने जा रहे है। एक सही सलामत इंसान वो हौसला और हिम्मत नही कर सकता जो एक कश्मीरी युवा लड़की ने कर दिखाया। कहते है ना अपने हौसले और तकदीर को बनाने वाला खुद इंसान ही होता हैं। वि’कलां’ग होने के बाबजूद भी इशरत रशीद ने अपना नाम कमा ही लिया। इशरत अगले महीने थाईलैंड में होने वाले इंटरनेशनल व्हीलचेयर बास्केटबॉल टूर्नामेंट में खेलने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

इशरत के री’ढ़ की ह’ड्डी की चो’ट के कारण भी वो अपने हौसले को अंतराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए उनकी यात्रा तैयार है। आपको बता दे, 2016 में इश’रत अपने घर की दूसरी मंजिल से नी’चे गि’र गई थी। जिससे उनके री’ढ़ की ह’ड्डी में चो’ट आई थी।इशर’त ने एक न्यू’ज़ एजें’सी से इंटरव्यू में कहा बास्केटबॉल कोर्ट में जब प्र’शि’क्ष’ण करती थी तो लोग अक्सर मेरी हालत को देखकर मुझे बोला करते थे कि तुम अपनी जिंदगी में क्या करोगी।

कुछ लोगो ने ये भी कहा कि अगर में दु’र्घ’ट’ना से म’र गई होती तो बेहतर होता क्योंकि मेरे परिवार को इस परेशानी से नही गुजरना पड़ता। इशरत ने कहा कि “मैंने कुछ लड़कों को व्हल’चेयर बा’स्केटबॉल खेलते देखा है अगर वो ऐसा कर सकते है तो मैं क्यो नही कर सकती। इ’शरत ने कहा कि मैं जल्द ही टीम में शामिल हुई और रा’ष्ट्रीय आयोजनों के लिए चुनी गई।

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घा’टी में 3 70 अ’नुच्छेद और संचा’र प्र’ति”बं’धों के नि’रस्त होने के बाद, यह भा’रतीय से’ना और ज’म्मू क’श्मी’र पु’लिस थी। जिसने इ’शरत को सूचित किया कि उसे अं’त’राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत का प्र’तिनिधित्व करने के लिए चुना गया था। इशरत ने कहा कि मैंने कभी भी नही सोचा था कि मैं यहाँ तक पहुँच जाऊँगी। इशरत अंतराष्ट्रीय विशेष रूप से वि’क’लांग बास्केटबॉल हैं। आप और हम और एक आम इंसान इशरत से प्रेरणा लेकर बहुत कुछ सिख सकता है।

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