मिलिए गरीबों की मदद करने वाली सना हसन और फाइका हसन से, इंसानियत की मिसाल है बिहार की दोनों बहनें

को’रो’ना वाय’रस ने जब से दुनिया मे अपने पैर पसारे है जब से हर कोई जरूरतमन्द लोगो की मदद के लिए आगे आ रहे है। कोरो’ना की इस म’हा’मा’री में लाखों लोगों अपनी कमाई से बे’रोज’गार भी हुए है। सभी लोगो ने अपनी जिंदगी में पहली बार इतनी बड़ी महा’मा’री देखी है। को’रोना की इस लंबी लड़ाई में फिल्मी स्टार से लेकर छोटे मासूम भी साथ दे रहे है। इसी बीच जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली की बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर की छात्रा सना हसन ने ट्रेन सेसफ़र कर रहे श्रमिको को खाना उपलब्ध कराने के लिए पहल की है।

24 साल की सना ने अपनी बहन फ़ायका हसन के साथ मिलकर अपनी बचत के 4500 रुपयों से एक अभियान को शुरू किया है। जिसमे वो श्रमिको के लिए फूड पैकेट्स बाँट रही है।बिहार जिले के पटना से 50 किलो मीटर दूर आरा शहर की रहने वाली सना ने दो दिन पहले ही इसकी शुरुआत की है। उनके इस काम मे पिता सैयद एम शिबली हसन और उनकी माँ सीमाब हैदर का साथ मिल रहा है। उनके पिता सिविल कोर्ट में स्टेनोग्राफर के तौर पर कार्यरत है।

उन्होंने अब इस अभियान से अपने दोस्तों, अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्रों औऱ अन्य लोगो को भी जोड़ना शुरू कर दिया है।सना ने बताया कि आरा जंक्शन पर जब श्रमिकस्पेशल ट्रेन पहुँचती है तो पुलिस के सहयोग से फूड पैकेट्स बाटे जाते है। इस फूड पैकेट्स में बिहार में खाए जाने वाला चूड़ा जिसे धान से तैयार किया जाता है। उसे दिया जा रहा है इसके साथ गुड़,सत्तू, मूंग दाल, बिस्किट आदि चीजे बाटी जा रही है।

अब तक 150 श्रमि’को को फूड पैकेट्स बाटे जा चुके है। सना ने बताया कि हमारा संकल्प है रोजाना सो श्रमिको को यह फूड पैकेट्स मुफ्त में बाटे जाए। कोरोना की वजह से लोक डाउन जारी है। ऐसे हालातो में भी कई लोगो ने अपने घरों तक का सफर पैदल ही किया तो किसी ने अपनी जा’न गवा दी। श्र’मि’को के लिए ट्रेन की व्यवस्था की गई है। जिससे वो अपने घरों तक सु’र’क्षि’त पहुँच सके।को’रो’ना के हर दिन नए के’स सामने आ रहे है।

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