इनमें से किस जानवर का गोश्त खाना हलाल है ? जवाब जानने के लिए पोस्ट पढ़े …

इ’स्ला’म एक ऐ’सा म’हज’ब है जिसमे हर तरह के उसू;लों के बारे में बतौया जाता है। कि’स तरह आप खा’ना खा सकते है किस तरह से न’बी ki सु’न्नतों को अमल किया जाए। मु’स’लमा’न पांच वक्त की न’मा’ज को अ’दा करते है। मु;सल;मा’नो ह’ला’ल जनव’रो का गो’श्त खा’ते है।

हमारे न’बी स’ल्लहु’अ’लै’हि वस’ल’म ने बताया है कि कुछ जा;नव’र ऐसे है जिनका गो’श्त हला’ल फर’माया यानी कि हम उन्हें खा सकते है। सिर्फ उन्ही जा’न;वरों का गो’श्त खा’ना ह’लाल है। जिनके दां’तो में कि’ले न हो और शि’कार करके वो पं’जों को नो’च न कर’के खाते हो।

इसके अ’लावा आप स’ल्लाहुअ’लैहि वस’ल्लम ने फरमा’या की तमा’म की’ड़ो मकी’ड़ो को खा’ना मना फर’मा’या। इसके अलावा म’छली को खा’ना हलाल है। इसके अला’वा घो’ड़ा एक ऐसा जा’नवंर है जिसके नुकी’ले दाँत’ और न ही पं’जो से कोई शि’कार नो’च कर खा’ता हो।

इस लिए घो’ड़े का गो’श्त खा’ना हलाल है। हमारे नबी ने अपने दौर में इसे मा’मून क’रार दिया। इसकी वज’ह यह नही की घो’ड़े के गो’श्त खा’ना ह’राम है ब’ल्कि इस लिए कि यह आ’ला ए जि’हाद है।अगर लोग इसको खा लेंगे तो जि’हा’द में घो’ड़े की कमी होगी।

ऐसे में ख’ज्ज्र और ग’धे में यह स’भी गु’ण पाए जा’ते है लेकिन आ’प स’ल्लाहुअलै’हि व’स’लनम का इन पर क’लाम आ गया। यह तभी से खा’रि’ज है। इसका ‘गो’श्त ह’रा’म है। इसमें आपको’ बता दे कि घोड़े का गो’श्त हला’ल है।

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