म’स्जिद ए न’बवी के उस दरवाज़े के बारे में जानिए जहाँ से जि’ब्राईल वही लेकर आते थे

सऊ’दी अ’रब में हर साल दुनिया भर से लाखों इं’सान ह’ज और उ’मराह करने जाते है। हज करने वाले हा’जी लोग वहां पर 1 महीने रहते है और उम’राह करने वाले करीब 15 दिन में उ’मराह करके वापस आ जाते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है सऊ’दी की मशहूर म’स्जिदे और ऐ’तिहासिक जानका’री के बारे में। मु’स्लिम समुदाय में सबसे पवित्र स्थल स’ऊदी अरब में स्थित मक्का’ मस्जि’द, मदीना’ शरी’फ, मस्जि’द ए नबवी और मस्जि”दे ए अक्सा को माना जाता है।

म’स्जिदे अल्ह’राम जहाँ पर मुसल’मानों का ह’ज अदा होता हैं। यह दुनिया की सबसे बड़ी म’स्जिद हैं। आज हम बात करने वाले है म’स्जिदे न’बवी के बारे में और कुछ ऐतिहासिक बातों के बारे में। हम बात कर रहे है म’स्जिद ए नबवी के पहले दरवाजे के बारे में जो बाब- ए- जिब्रा’इल के नाम से पूरी दुनिया मे मशहूर है। क्या आपको बता है इसे बाब- ए- जि’ब्राइल क्यो कहते है? इस मस्जिद की पवित्रता और प्रसिद्धता के बारे में।

इसे बाब- ए – म’स्जिद इसलिए कहा जाता है क्योंकि जिब्रा’इल अलै’हि सला’म इसी रास्ते से वहि लेकर ना’जिल होते थे। इसकी ऐतिहा’सिकता को बरकरार रखने के लिए इसे आज भी वैसा ही बनाया गया हैं। यह दिखने में बेहद ही खूबसूरत लगता है। इस वाकये में जिब्रा’इल अहजब की लड़ाई के बाद पैगम्बर मोहम्मद के पास आए ।

और बाब- ए -द’रवाजे पर मोहम्मद सल्ला’हुअलेही वसल्ल’म ने उनसे बात की। बता दे कि यह वाकया कॉन्फे’डेरेट्स की लड़ाई और खंदक के रूप में भी जाना जाता हैं। बाब ए जिब्रा’इल और बाब -ए -उस्मा’न यह दोनों दरवाजे है। यह दोनो दरवाजे म’स्जि’दे ए नब’वी के अंदर स्थित हैं। ‘जि’ब्राइल अ’लैहि सलाम फरिश्ते के रूप में आते थे।

जिब्रा’इल अलै’हि स’लाम दुनिया मे क्या होने वाला है और क्या होगा इन सब का अल्लाह उनको वही के जरिये मालूम करा दिया करते थे। ‘वहि’ के जरिये कु’रान शरी’फ की आ’यत उतरती थी। इसी को वही कहा जाता था। ‘वहि’ के जरिये सहा’बा को ख़बर दी जाती थी। वही एक लि’फाफे के जरिये जिब्रा’इल लेकर आते थे।

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