शा’हीन बाग़ प्रदर्शन के स’मर्थन में पहुँचे क’श्मीरी पं’डित, बोले- आ’ज़ादी के बाद सबसे बड़ा आं’दोलन

ना’गरिकता का’नून को लेकर शाही’न बाग प्रद’र्शनों का केंद्र बना हुआ है । एनडीटीवी ने भी शा’हीन बा’ग की उस स्टो’री को कवर किया जो आज हम आपको बताने जा रहे है, यह स्टोरी कश्मी’री पंडि’तो के शाही’न बा’ग से जुड़ी है ।बता दे, देश के लगभग हर राज्यों में CAA और NRC के खि’ला’फ वि’रोध प्रदर्शन देखने को मिलरहे है। इस का’नून को वापस लेने के लिए कई तरह की रैलियों की जा रही है जिसमें महि’लाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है ।

यह बात और तब सत्य हो जाती है जब दिल्ली के शाहीन बाग में बैठी दा’दीया , यूपी की राजधानी लख’नऊ के घं’टाघर में मौजूद हज़ारों की संख्या में माँ बहने , प्रया’गराज के रोशनबाग में बैठी हज़ारों की तादाद में बैठी म’हिलाएं इस आंदो’लन की कमान संभाल रही है । ताज़ा जानकारी के अनुसार देश के अलग अलग राज्यों में तकरीबन 100 से अधिक जगहों पर ना’गरिक’ता का’नून के खिलाफ 24 घण्टे प्रदर्शन चल रहा है ।

दिल्ली के शाहीन’बाग में महिलाए करीब 35 दिनों से लगातार वि’रो’ध लर रही है। इस कानून के वि’रो’ध में कई फिल्मी स्टार , सोशल एक्टिविस्ट , नेता और आम जनता खुलकर सामने आई है। इस प्र’दर्श’न के दौरान फिल्मी निर्माता विवेक अग्रिहोत्री ने दावा किया है कि 19 जनवरी को शा’हीन’बाग में क’श्मी’री हि’न्दू नर’सं’हार का ज’श्न मनाया जाएगा। प्रदर्शनका’रियों ने रविवार को कश्मी’री पीड़ितों के साथ एकजु’टता के लिए बैठक का आ’ह्वान किया था।

इसके लिए कश्मी’री पीड़ित इंदर सलीम और थिएटर हस्ती एमके रैना को आमंत्रित किया था। इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान एमके रैना ने कहा कि शाहीनबाग आजादी के बाद का सबसे बड़ा गाँ’धी वादी सत्या’ग्रह में से एक है। यह एक ऐसा आंदोलन है जो ह’मारे देश को नया रूप देगा।

वही, इंदर सलीम ने कहा कि कश्मी’रियों को भारत और पाकिस्तान के बीच दो हिस्सों में बां’ट दिया गया है। मेरा यह भी मानना है कि 90 के दशक के शुरुआती दिनों में नि’हत्थे ना’गरिकों, मुस्लि’मो और पंडि’तों की ह’त्या ने प’ला’यन को एक सम्भा’वना बना दिया था। उन्होंने कहा कि कश्मी’री पी’ड़ितों के लिए ए’कजुटता एक सा’धारण कदम है।

जामिया एलुमि’नाई और फ़िल्म निर्मा’ता सबा रहमान पिछले एक महीने से वि’रोध प्र’दर्शनों में सक्रि’य रूप से भाग ले रहे है। उनका मानना है कि इस तरह की एक’जुटता से दोनों समुदायों खासकर हर हि’न्दुस्तानी को नया जोश मिलेगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में संघ’र्ष पुराना है। उन्होंने ये भी 19 जनवरी के इवेंट का कश्मी’री हि’न्दु’ओ के न’रसं’हार के दिन के रूप में कोई लेना देना नही हैं।

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