हिंदुस्तान की कहानी: बचपन में ही अनाथ हो गई थी पूजा, महबूब ने पिता बनकर निभाए तमाम फर्ज

भार’त देश को सि’ख, मुस्लि’म, हि’न्दू और बौ’द्ध सभी आपस मे एक थे। आज़ादी की ल’डाई में इन सभी के लोगी ने मिल’कर लड़ी है। भा’रत का निर्माण किया है। इसे तो’ड़ने वाले कल भी थे और इसे तोड़ने वाले आज भी मौजूद है। ऐसे मा’हौल में एक एकता की मि’साल भी पेश हुए है।

कर्नाटक के वियपा’पुरा की रहने वाली पू’जा के सर से महज 8 साल में ही माता पिता का साया उठ गया था। पूजा के रिश्ते’दारों ने भी उसको अप’नाने से मना कर दिया। ऐसे में मुस्लि’म समाज से ता’ल्लुक रखने वाले मह’बूब मस’ली ने पूजा को अपनाया। महबूब के दो बेटे और दो बेटी है ।

mehboob ali

उन्होंने पूजा को अपने ही घर की बेटी माना है। उन्होंने एक पिता का जिम्मा उठा’कर उसको पढ़ा’या लिखाया भी है। उन्होंने उसे अभी अपनी ही ब’च्ची समझा है। जब पूजा 18 साल की हुई तो उ’न्होंनेएक ‘हि’न्दू दू’ल्हे से पूजा की शा’दी भी करवाई है।

उन्होंने कहा है कि यह मेरी जिम्मे’दारी थी कि मैं उ’सकी शा’दी हि’न्दू रीति’रि’वाजों से करवाऊँगा। मैने कभी भी उसपर हमारी सं’स्कृति अपनाने का दबाव नही डाला है। कभी भी इ’स्लाम अप’नाने का दबाव नही डा’ला। पू’जा का कहना है कि मैं बहुत ही ज्यादा खुशन’सीब हूं कि मुझ ऐसे माँ बाप मिले है

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जिन्होंने मेरा काफी ज्यादा ख्याल भी रखा है। पूजा की शादी में हि’न्दू और मुस्लि’म ध’र्म के लोग भी शामिल हुए ह। पूजा की शादी बिना दहेज के भी हूई है महबुब की सभी लोग काफी ज्यादा इ’ज्जत भी करते है। क्योकि उन्होंने मजह’ब के तौर पर मि’साल को कायम किया है।

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