मेवातियों की शान मंगल खान के बारे में जानिए , जिन्होंने अंग्रे’ज अफसर के मुँह पर थू’का था

आज के प’श्चि’म बंगाल की राजधानी को’ल’काता में ज’ग’र ग’च्छा जे’ल है , इसमें कै’दी नं’ब’र 56 है। जो कल अं’ग्रे’जों की आ’र्मी में था लेकिन आज ब’गा’व’त के कारण आ’ज़ा’द हि’न्द फौ’ज में है। और ‘आ’ज़ा’दी की ल’ल’क के का”र’ण जे’ल में बं’द है। उन्हें जे’ल में खा’ना ऐसे दिया जाता है जैसे कु’त्ते बि’ल्ल्यों को दिया जाता है। रो’टी दू’र से ही फें’की जाती है। एक दिन ‘फि’रं’गी जे’ल देखने आता है और उनसे थोड़ा घू’र’क’र पूछता है। ओह .. तो तु’म हो ब’हा’दु’र भा’र’ती’य सि’पा’ही।

फि’रं’गी मुँ’ह ब’ना’ता ब’ना’ता अपने पी’छे ख’ड़े सा’थी से बो’ल’ता है। फि’रं’गी का सा’थी बो’ल’ता है , य’स सर। फिर फि’रं’गी अ’फ’स’र अपना हा’थ उन दोनों बै’र’क में लगी स’ला’खों पर रखता है। फि’रं’गी का ये सवाल सुनकर वह बहुत गु’स्सा हो गया। बड़े अफसर मौजूद अ’फस’र ने उस नौ’ज’वान का हाथ दबा दिया ताकि वह ख’ड़ा न’हीं हो पाए। फि’रं’गी कुछ देर फिर वही दो’ह’राया ,लेकिन इस बार नौ’ज’वान हि’म्मत करके सी’ना ता’न’कर ख’ड़ा हो गया। फि’रं’गी ने उस नौजवान से पूछा -बोलो बोलो – खा’ना कैसा मिलता है।

इस बार अफसर का आदेश मानने से म’ना किया और त’न’कर ख’ड़ा हो गए। फि’रं’गी अ”फ’स’र गु’स्से में था उसका चे’ह’रा उ’त’रा हुआ था। एक बार फिर बड़े अफसर ने उनसे पूछा खाना कैसा मिलता है ? फि’रं’गी अ’फ’स’र का सवाल सुनना था उधर अभी अभी बहुत मु’श्कि’ल से खड़े हुए नौजवान ने अपने मुँ’ह में से ख’खा’र नि’का’ल पर उस ब’ड़े अं’ग्रे’ज अफसर में ‘मुँ’ह पर थू’क दिया। दाँ’त पि’स’ते हुए नौ’ज’वान बोला ,यहां ऐसा ही खा’ना मिलता है।

बड़े अ’फ’सर के साथ मौजूद छोटे अफसर ने गु’स्से से बोला – “मं’ग’ल खा’न ये तुमने ठीक न’हीं किया”। वो आगे बोला तुम मे’वा’ती कही भी बा’ज़ न’हीं आते हो क्या ? इधर बै’र’क में कै’दी इस घ’ट’ना के बाद स’द’में में थे तो वही दूसरी ओर मं’ग’ल खान बड़े अफसर को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे। जे’ल में मौजूद सभी बै’र’क में तेज तेज आ’वा’जें आने लगी। कुछ अफसर बोले -इसे बा’ह’र नि’का’लो। इसको इतना मा’रो की ये भा’रत का नाम भी न’हीं ले पाए। सब ऑफिसर गु’स्से में थे।

इस नौ’ज’वान का नाम मं’ग’ल खा’न’ था जिसने अं’ग्रे’जो को हि’ला दिया था। मं’ग’ल खा’न हरियाणा के मेवात जिले के खे’ड़’ला गां’व में ज’न्मे। इनका ज’न्म एक सा’ध’रण परिवार में हुआ ,इनके पिता खे’ती किया करते थे। मं’ग’ल खा’न 1924 में ब्रि’टि’श से’ना में भ’र्ती हुए। लेकिन उन्हें फि’रं’गी ज्या’दा स’म’य तक रा’स न’हीं आए और फिर वह बा’गी होकर आ’ज़ा’द हि’न्द फौ’ज में चले गए। वह आ’ज़ा’द हि’न्द फौ’ज में शा’ह’न”वा’ज ब’टा’लि’य’न सेकंड ले’फ्टि’नें’ट ‘भी रहे।

Leave a Comment