मुसलमानों को ‘पराया’ साबित करने की कोशिश की जा रही है- हामिद अंसारी ( पूर्व उपराष्ट्रपति )

हमारे देश मे अनेक ध’र्म को मानने वाले लोग निवास करते है। हमारे देश में हज़ारो साल पूर्व से ही सभी ध’र्मो को समान मान्यता प्राप्त है। लेकिन इन सब के बावजूद भी मु’स्लि’म समाज को बीते सालों से लगातार नि’शा’ना बनाया जा रहा। समय समय पर इसके वि’रो’ध में आवाज उठती रही है लेकिन किसी पर जू तक नहीं रेंगती है।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने बयान में इस बात पर अफ’सो’स जताया कि देश में कुछ लोगो द्वारा मु’स्लि’मो को प’राया करार देने कि सं’ग’ठित कोशिश कि जा रही है । हा’मिद अंसारी ने अपनी किताब बाय मैनी ए हैपी एक्सीलेंट मै इस बात को जिक्र करते हुए लिखा है कि मेरे मु’स’ल’मान होना मायने नहीं रखता है बल्कि मेरे पेशाव’र योग्यता” उनके लिए मायने रखती है।

hamid ansari
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उन्होंने एक सवाल करते हुए कहा कि क्या मैं नाग’रिक हूं या नहीं? यदि मैं नागरिक हूं तो मुझे उन सभी चीजों का लाभ मिलना चाहिए जो एक नागरिकता से मिलती है। उन्होंने अपनी बात को पूरी तरह से सपष्ट नहीं किया है उन्होंने आगे कहा भारत में ब’हुलता’वा’दी समा’ज सदि’यों से अस्ति’त्व में है।

उन्होंने आ’रो’प लगाया है कि भारत में मु’स्लि’म पहचान को जा’न’बू’झकर नि’शा’ना बनाया जा रहा है और वर्तमान शा’सक उन्हें शा’ति’र तरी’के से नि’शा’ना बनारहा है। अं’सारी ने कहा कि मुस्लि’म प’हचान पर बहस बि’ल्कुल फाल’तू है।

hamid ansari released
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हर व्यक्ति कि कोई न कोई पह’चान जरूर होती हैं। उन्होंने कहा कि चार दशक तक पेशेव’र रा’जनायक के रूप में उनके अनुभ व में तो उनके मुस’ल’मान होने कि चर्चा नहीं होती। जब में मुश्किल दौर में संयुक्त राष्ट्र मै था तो मेरा मुस’लमां होना मायने ‘न’हीं रखता था मेरा पेशा मेरे लिए मायने रखता था।

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