मिलिए एशिया की पहली महिला इंजन ड्राइवर मुमताज़ से, ट्रेन चलाने का बना चुकी है ये रिकॉर्ड , नारी शक्ति का भी ….

एशिया की पहली महिला डीजल इंजन ड्राइवर मुमताज की कहानी आज सभी के जुबा पर है । जब प्रणव मुखर्जी ने मुमताज को नारी शक्ति का पुरुस्कार दिया तो सभी एक बार तो हैरान हुए लेकिन बाद में जब इनके बारे में जाना तो पहले से ज्यादा ताजुब्ब हुआ । मुमताज को नारी शक्ति का पुरस्कार उनकी कड़ी मेहनत के बाद मिला । उन्होंने भारतीय रेलवे की जिस प्रकार सेवा की उसको देखते हुए सरकार ने भी उन्हें सलाम किया ।

बताया जाता है मुमता’ज का इंडियन रेलवे में।नॉकरी करने का सफर इतना आसान नही रह जितना कि और लोगों का होता है । मुमताज को प्रोफेशन चुनने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ा। मुमताज को बगा’व’त करना पड़ा इसके बाद ही वो भारतीय रेलवे में नॉकरी कर पाई ।

mumtaz kazi news

मुमताज सबसे पहले मुम्बई की लॉक’ल ट्रेन चलाती थी । उन्होंने शिवाजी महाराज टर्मिनल ठाणे पर मध्य रेलवे की ट्रेन चलाई । बता दे, इस मार्ग पर रेल चलाने वाली मुमताज पहली महिला ड्राइवर थी । 1995 में उनका ये रिकॉर्ड लिमका बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है ।

मुमताज एक मुस्लिम परिवार से आती है । उनके लिए ये सफर आसान नही था, फिर भी उन्होंने हिम्मत नही हारी । उन्होंने 1989 में रेलवे के लिए आवेदन किया था । 20 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने ट्रैन चलाने का गौरव प्राप्त हो चुका है । मुमताज पिछले 25 सालों से ज्यादा से भारतीय ट्रैन चला रही है ।

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बता दे, मुमताज के पिता भी रेल्वे मे।वरिष्ठ अधिकारी थे, उन्होंने मुमताज के रेलवे में आने पर भारी विरोध किया था । लेकिन समय के साथ वो नरम पड़ते गैई और उन्होंने अपनी बेटी को उनका पसंदीदा काम करने की इजाज़त दे दी । मुमताज़ कहती है कि उन्होंने सपने को जिया है, शुरआत में विरो’ध हुआ लेकिन उन्हें सफलता जरूर मिल गई ।

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