दुनियाभर में मुस्लिम शिक्षा में सबसे पिछड़ा समुदाय, मुस्लिम देशों में सिर्फ़ इतनी यूनिवर्सिटी और भारत में सच्चर कमेटी की ये …

इ’स्लाम मे शिक्षा का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि सबसे पवित्र किताब क़ु.र.आन में इक़रा का जिक्र किया गया है । कहा गया है कि अगर शिक्षा प्राप्त करने के लिए अगर चीन भी जाना पड़े तो जाओ लेकिन बेहतरीन तालीम हासिल करो । लेकिन आज मु’लमान शिक्षा के मामले में लगातार पीछे होते जा रहा है, अगर हम इ”स्लामिक मुल्कों की बात करें तो यह स्थति बहुत चिंताजनक लगती है ।

अगर देश की ही बात करें तो सच्चर कमेटी से मुसलमानों की पूरी सच्चाई सामने आ जाती है । देश मे मुसलमान की सरकारी नौकरियों की बात करें तो बहुत ऐसे सेक्टर है जिसमें यह 1-2 फीसद है । अधिकतम 4-6 फीसद के बीच ही मुसलमान सरकारी जॉब में है । यह आंकड़ा आपको पूर्व पीएम द्वारा गठित सच्चर कमेटी में मिल जाएगा । इसमें सबसे हैरतअंगेज बात ये भी है कि मुसलमानों शिक्षा के क्षेत्र में ही नही बल्कि नौकरी, स्वास्थ में भी बहुत पिछड़ा हुआ नजर आता है ।

हम आपको एक कहानी बताने जा रहे है जो की यहूदी समुदाय से जुड़ी है । ये एक कड़वी सच्चाई भी है कि जिन मुसलमानों की जिम्मेदारी पूरी दुनिया को समझाने की थी आज उन्हें खुद समझाने के लिए दूसरे समुदाय का सहारा लेना पड़ रहा है , क्या इसके जिम्मेदार हम खुद नही है । बात करीब 50 के दशक की है । बताया जाता है 1949 में दुनियाभर के जो अमीर य’हू’दी थे, उन्होंने मिलकर लगभग 1 अ’रब डॉ”लर पैसे ज’मा किए थे। जिसमें मशहूर वैज्ञा’निक आ’इंस्टीन भी शामिल थे ।

उन सब ने तय किया तो य’हू’दी का एक ऐसा इ’बा’द”तगाह सि”ने’गॉग बनायेंगे जो दु”निया में ऐसा कही न’ही होगा। वो इस इबा’दतगा’ह को जेरु’लस’लम बना”ने की सोच रहे थे। तभी एक य’हू’दी के धा’र्मिक गुरु प्र”मुख र”बी को मशवरा दिया कि आप एक अर’ब डॉलर किसी ए’जु’केशन ट्र’स्ट बनाने के लिए लगा दो। जिससे आने वाले पी”ढ़ी अपने भ”वि’ष्य बना सके, अ”नपढ़ न रहे। और वह पूरी दुनिया पर रा’ज़ कर सकें ।

य’हू’दी प्रमुख र’बी का यह ‘म’श’व’रा उस मुख्य सलाहकार को स’म’झ मे आ गया, उसने ऐसा ही किया। इस पर कई साल सोच विचार के बाद आखिरकार कई ला’इब्रे’री बनाई गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि आज य’हूदी’ में अ’नप’ढ़ देखने को न’ही मिलते है। उन्होंने पूरी दुनिया के कई बिजनेस को संम्भाल रखा है,रोज़मर्रा की कई चीजें ऐसी है जो उन्ही लोगों ने बनाई है जो आज से 60-70 साल पहले पढ़ाई पर धयान लगा दिया था ।

क्या आपको पता है , छोटे से देश इज’राइल में 45 ऐसी यूनिवर्सिटी है जो अन्तरा ष्ट्रीय स्टेंडर्ड को फॉलो करती है। जानकारी के लिए बता दे, अमेरिका में करीब 5 हज़ार से ज्यादा यूनिवर्सिटी है। जबकि जापान के सिर्फ एक शहर टोकियो में 1000 यूनिवर्सिटी है। जो सभी अन्तराष्ट्रीय स्टेंडर्ड के मुताबिक है। अगर भारत की बात करे तो 8000 यूनिवर्सिटी है,इसमें 400 अन्त’राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी के मुताबिक है।

अगर हम इस मामले में मुस्लिम देशों में यूनिवर्सिटी की बात करे तो आपको बहुत ज्यादा हैरतअंगेज वाली बात होगी। 60 से ज्यादा मुस्लिम देशों की अगर सभी यूनिवर्सिटीयो को जोड़ दिया जाए तो यह तकरीबन 500 होती है ।यानी मुस्लिम दुनिया के 60 देश, जापान की राजधानी टोक्यो जितनी यूनिवर्सिटी भी नहीं है । अगर इन मुस्लिम दुनिया की 500 यूनिवर्सिटी के अंतराष्ट्रीय स्टैंडर्ड की बात करें तो यह संख्या 50 के करीब हो जाती है ।

जो कि किसी भी पढ़े लिखे व्यक्ति की जिं’ता बढ़ा सकता है । आप भी इस पर सोचिए और विचार कीजिये । अपने बच्चो को पढ़ाइये और अगर आपकी माली हालात सही है तो किसी टेलेंटेड बच्चे पर पैसा जरूर खर्च कीजिये । चाहे वह अपना हो, रिश्तेदार हो या फिर पड़ोसी । जाते जाते एक बात और, लेख अच्छा लगा हो और कुछ सीखने को मिला हो शेयर जरूर करें ।

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