70 साल पहले मुस्लिम ने दी थी एक हिन्दू को जुबान, जिसका वादा पीढ़ीयों बाद भी निभाया जा रहा है, जानिए

यू तो भारत पा’कि’स्तान के वि’भाजन को 73 साल बीत चुके है। इन सालो में दोनो देशो की से’ना’ओ बल्कि ना’ग’री’को के लिए एक दूसरों में आपसी मोहब्बत देखी जा रही है। एक पुरानी पीढ़ी है जो न’फ’र’तो से परे भा’ईचा’रे में विश्वास करती है। न’फ’र’तों की तो ऐसी तो सेकड़ो कहानियां हमारे सामने आती है और आती रहेगी लेकिन आपसी प्यार की एक ऐसी सच्ची कहानी सामने आई है पा’कि’स्तान से जो किसी की भी आं’खे न’म कर देगी।

ये खबर केवल सो’शल मी’डिया पर ही नही बल्कि अंत’रास्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में चल रही है।1947 में भारत और पाकिस्तान के वि’भाज’न के दौरान लोरलाई ब’लू’चि’स्ता’न में किराए की दुकान में व्यवसाय करने वाले एक हि’न्दू दुका’न’दार दिनांनाथ को भी बटवारे के चलते हुए भारत आना पड़ा था।

muslim had given the hindu such a promise

लेकिन जाते वक्त बहुत रो’या और गांव के लोगो को इस बात का दिलासा दिलाया की मैं वापस आप लोगो के पास जरूर लौटकर आऊँगा। जाते वक्त आने की उम्मीद में दुकानदार ने दुकान का ताला लगा दिया। लोरलाई में मौजूद इस दुकान में आज भी वही ताला लगा हुआ है।

जो दुकानदार जाते वक्त चाबी अपने साथ ले गया था उस दिन ब’न्द की गई येदुकान 73 साल बाद भी बन्द पड़ी हुई है। मौसम बदले, साल बदले लेकिन जिस आदमी ने वापस आने का वादा किया था वो अब इस दुनिया मे नही रहे है। मकान मालिक ने भी अपने बच्चों से म’र’ने से पहले सख्त ता’क़ीद कहकर कहा था कि इस दुकान का ता’ला म’त तो’ड़’ना।

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मैंने उस दुकानदार को अपनी जबान दी है कि ये दुकान तुम्हारे आने तक ब’न्द रहेगी। हालांकि उन लोगो को इस बात की जानकारी है कि वो दुकानदार इस दुनिया मे नही रहे है लेकिन उन्हीने अभी तक दुकान खोलने की कोशिश नही की। अब दोनों दुकानदार ओर मालिक भी इस दुनिया मे नही है।

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