ऑस्ट्रेलिया में इस हि’जाबी मु’स्लिम महिला ने रचा इतिहास, बनी पहली हि’जाबी नेवी कैप्टन और …

आज हमारे देश की बात हो या फिर विकसित, विकसशील देशों की बात वहां पर कई विभागों में महिलाओं के सम्मान को प्रमुख तौर पर प्रमुखता दी जाती है। इस सदी में महिलाओं का समाज मे योगदान का शत- प्रतिशत का आकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा हैं। महिलाए अब अपने माता पिता और समाज मे ही नही बल्कि अपने राज्य और देश का नाम पूरी दुनिया मे रोशन करने में लगी हुई है।

आज ऐसी ही कहानी हम आपको बयान करने जा रहे है। ऑस्ट्रेलिया की नोसेना पहली मु’स्लि’म हि’जाब पहने कप्तान, कैप्टन मोना शिंदे की । यह एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और इ’स्ला’मिक सांस्कृतिक मामलों पर नोसेना के रणनीतिक सलाहकार की प्रमुख हैं। इनको कई विश्व नेताओ ने सम्मान भी दिया है। इनकी कहानी बेहद ही खूबसूरत है और इतिहास बनाने वाली महिला है।

इनकी माँ और दादी नही चाहती थी कि वो पढ़े लिखे । लेकिन वो अपने फैसले से पीछे नही हटी , रात दिन मेहनत के बाद वो आज बड़ा मुकाम हासिल करने में कामयाब रही । आपको बता दे, जब मोना 3 साल की थी तब अपने परिवार के साथ मिस्र से ऑस्ट्रेलिया चली गई और सिडनी में मरुबरा में बस गई। जब वो 14 साल की थी तब इनके पिता का नि’ध’न हो गए था।

मोना की माँ को 4 बच्चों की परवरिश करना पढ़ा। इनके लिए बहुत ही ज्यादा दु’ख के दिन थे। उस समय उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी मेहनत करके आज वो इतने बड़े पद पर है। इन्होंने अपनी सफलता को पूरा किया है। मोना की शादी हो चुकी है। इनके 3 बच्चे है। यह 26 साल से नोसेना में हैं। आपको बता दे, सऊदी अरब भी महिलाओं की तरक्की के लिए लगातार उसमें छूट देता हुआ आ रहा । किंग सलमान सऊदी के मिशन 2030 से जुड़े कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ा रहे है ।

वह सऊदी को नई दिशा में ले जा रहे है । इसलिए सऊदी मीडिया का मानना है कि विकास के लिए कुछ चीज़ो का बदलाव करना बेहद जरूरी है । सऊदी महिलाओं को काफी विभागों में रियायत दी है । वही सऊदी अरब की कई कंपनियों में प्रवासियों के जॉब करने पर पा’बं’दी लगा दी है । यह पाबंदी 10-70 फीसद तक हुई है । सऊदी पर जानकारी रखने वाले सीनियर पत्रकारों का मानना है कि सऊदी अपने लोगों को धीरे धीरे कार्य सीखा रहा है ताकि वह भी दुनिया के उन्नत देशों में शुमार हो सके ।

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