मुस्लिम वैज्ञानिकों के इन 3 आविष्कारों ने बचाई कोरोना से करोड़ो लोगों की जिंदगी, जानिए आविष्कारों के बारे में विस्तार से ..

को’रोना म’हामा’री ने दुनियाभर मे तबा’ही मचा दी है करीब 4.44 million पोजि’टिव केस अब तक सामने आ चुके है । वही को’रो’ना से म’र’ने वालो की संख्या करीब 3 लाख से अधिक हो चुकी । बता दे, को’रो’ना का सं’क्रम’ण दिनो दिन बढता ही जा रहा है । लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की अगर दुनिया मे मु’स्लि’म के ये तीन अविष्कार जी’विणु’रो’धी साबुन , एल्को’ह’ल ओर क्वा’राटांइ’न नही होते तो को’रो’ना से दुनिया को ब’चा पा’ना ना’मुमकि’न था ।

तो, आइए जानते है इन तीनो महत्वपुर्ण आ’वि’ष्कार के बारे मे 1) जी’विणु’रो’धी साबुन – डब्ल्यूटीओ यानी वर्ल्ड है’ल्थ ऑ’र्गेनाइ’जेशन के की साइट पर पहली निर्देशांक या सिफारिश के अनुसार ” अपने हाथो को जी’वा’णु’रो’धी साबुन से धोना , आपके हाथ पर लगने वाले वा’इ’रस को मा’रा सकता है ” । को’वि’ड-19 से ब’चा’व हेतु बडे-बडे जानकार ओर वि’शे’ष’ज्ञ जी’वि’णु”रो’धी साबुन से हाथ धोने को को’रो’ना से ब’चा’व का एक कारगर उपाय मान रहे है ।

प्रा’चीन काल के इतिहास के तथ्यों के हिसाब से बात करे तो बाबुल मे करीब 2800 ईसा पूर्व साबुन जैसी सामग्री के सबुत मिलते है । आज हम जिस साबुन क बट्टी को जानते है ओर उसे इस्तेमाल करते है इसे सबसे पहले 10 वी शताब्दी के मु’स्लि’म स्वर्ण युग मे मध्य पूर्व उत्पादित किया गया था ।फारस के मशहूर चिकित्सक ,किमायागर ओर दार्शनिक अबु बक्र मुहम्मद इब्न ज़कारिया अल राजी ( 854-925 ) , जिनको पश्चिम मे रिहाज या राजी के नाम से भी पहचाना जाता है ।

साबुन बनाने के लिए कई तरह के व्यंजनों का वर्णन किया। उस दौर मे सी’रि’या, मु’स्लि’म मु’ल्कों सहित युरोप वगैरह मे भी साबुन के निर्यातक के रूप मे उभरा । करीब 13 वी शताब्दी तक मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका मे साबुन का उत्पादन दमिश्क , फैज, नब्लक ओर अलैप्पो इत्यादि के स्रोतो के साथ काफी फै’ल गया ।2) एल्को’ह’ल -एक लम्बे अरसे से मा’नव जा’ति ए’ल्को’हल को एक प्रमुख संवेद’नाहा’री के रूप मे इस्तेमाल करती आयी है ।

इतिहासकारों ने एल्को’हल की खोज को करीब 2000 ईसा पूर्व का माना है । हालांकि इससे पहले भी इसके प्रयोग के प्रमाण मिले है ।अल रजी ने घा’वों पर स’र्ज’री से पहले , बाद मे तथा सर्ज’री के दौरान एल्कोह’ल के ए’न्टिसे’प्टीक उपयोग का तर्क दिया था ।मे’डि’कल इनसाइक्लोपीडिया ” अल-होवी ” मे द कम्प्रीहेन्सीव बुक ओन भेजा इन का अनुवाद भी किया तथा चि’कि’त्सा से जुडे कई महत्वपूर्ण तर्क दिये ।

बगदाद ,इरा’क के सबसे पहले अस्पताल मे कि’टाणुशो’धन विधि शुरू की गयी थी । जो कि उस वक्त के अलरशीद द्वारा 805 ईस्वी मे शुरु की गई थी ।इसके बाद यह प्रथा इ’स्ला’मी दुनिया मे फैल गयी ।3) क्वारटांइन – को’रो’ना म’हामा’री के कारण मार्च के अन्त तक दुनिया के अमुमन पुरे देश क्वार’टांइ’न हो चुके थे, को’रो’ना वा’इर’स को रो’क’ने के लिए दुनियाभर मे लोकडाऊन की घोषणा की गई ।

रो’गो ओर म’हा’मा’री को रोकने के लिए सबसे पहला तर्क ” द कै’नन ऑ’फ मे’डि’सि’न ” मे दिखाई दिया । जिसे फ़ार’सी मु’स्लि’म पा’लीँ’मैड इ’ब्न बिना ( 980-1037 ) के द्वारा संकलित पांच-खण्ड चि’कि’त्सा विश्व’को’ष के रूप मे दुनियां भर मे जाना जाता है ।

इब्न सिना 40 के सेनेटरी अलगाव के माध्यम से छुत( टचेब्लिटी) से बचने के लिए विधि नामित करने वाले पहले व्यक्ति के रूप मे जाने जाते है । उन्होंने इस विधि का नाम ” अल-अरबिया ” दिया ।शाब्दिक रूप से इस विधि का वेनिस अनुवाद ” क्वार’टांइन ” के रूप मे किया गया ।कालांतर मे म’हा’मा’री , रो’ग के ती’व्र प्र’सार को रो’क’ने के लिए क्वार’टांइ’न जरूरी बन गया ।

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