बुजूर्गो ने मस्जिद को हम’लाव’रों ने बचाया, नार्वे सरकार ने नमाजियों की बहादुरी का दिया ईनाम, मिला सबसे बड़़ा सम्मान

2019 में नॉर्वे की एक म’स्जि’द में ओस्लो में पश्चिम में बेरूम अल नूर ‘इ’स्लामिक सेंटर पर कुछ बंदू’क’धा’री लोगो ने धा’वा बोल दिया है। उन बं’दू’क’धा’रियों से निपटने के लिए दो बुजुर्गी ने अपनी जा’न की परवाह किए बगैर उसको पकड़े रखा और पुलिस के हवाले कर दिया।

इस हा’द’से को एक साल पूरा होने के बाद दोनों बुजीर्गो को नायक और महान कार्यो के रूप में सम्म्मनित किया गया है। नॉर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सबसे ज्यादा मायने रखता है कि दो बुजुर्गी रफीक और इकबाल ने उसको रो’का और फिर मस्जि’द को नुकसा’न से ब’चा’या है।

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B Tiwnrum टाउन हॉल में एक समारोह के दौरान व्यापर और उद्योग मंत्री, lselin ने रफीक और इकबाल को पदक प्रदान किए है।बता दे कि रफीक को गोल्ड मेडल ऑफ ऑनर और इकबाल को सिल्वर में नोबल डीड के लिए सम्मानित किया गया है। जो बेहद ही खास है।

65 साल के सेवानिवृत्त पाकिस्ता’न की वायु सेना अधि’कारी भी उन लोगो मे शामिल थे, जब 22 साल के सं’दि’ग्ध फिलिप मसीह जब म’स्जि’द में थे। उन्होंने इसको पकड़े रखा और पु’लिस के हवाले कर दिया। जब मुस्लि’म समुदा’य के लोग ईदुल अजहा मानने की तैयारियां कर रहे थे।

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इकबाल जो पाकिस्तान के खा’नवेल के मूल निवासी ने अपरा’धि’यों पर काबू पाने में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा नार्वेजियन मीडिया ने बताया है कि इस हम’ले से एक घण्टे पहले ही ऑनलाइ’न फॉर्म डाला गया था, जहाँ पर उन्होंने न्यूजीलैंड में दो म’स्जि’दों पर हुए ह’म’लों की ह’म’ला’वर की प्रशंसा भी की थी। जिंसमे 51 लोग मा’रे गए थे।

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