पै’ग़म्बर मु’हम्मद (स.अ.व.) की इस सु’न्नत को अदा करें तो नहीं होगी ये जा’नले’वा बि’मारी, खड़े होकर न करें ये काम

हमारे महाशरे में हर प्रकार के लोग रहते है । आजकल लोग बी’मारी के कारण ही परे’शान होते है। ना जाने तो कितने चक्कर तो उन लोगो के महीने में हॉ’स्पि’टल में लग जाते है। क्या आप ने कभी गौर भी किया है कि कोई भी इंसान बी’मार ही ना रहता हो। यह बात आपको सुनने में थोड़ी अजीब ही लग रही होगी। लेकिन यह बात एक दम सही है। हमारे न’बी के जमाने मे कोई भी स’हाबी बी’मार ही नही रहते थे।

हमारे नबी ने उन लोगो को एक नु’स्खा बता रखा था। जो एक सु’न्नत भी है। वो लोग सु’न्नत की मुताबिक अपनी जिंदगी को गुजारा करते थे। आज हमारे महाशरे में ऐसे कई लोग है। लेकिन ज्यादातर तो बाहर के खाने की पीछे ही भागते है। आज लोग बाहर की होटल पर खाना खाते है, चाउमीन, बर्गर जैसी कई चीज़ो को आज की जनरेशन अपने डेली लाइफ में यूज कर रहे है। आज हम अपनी सेहत को लेकर बहुत ही ज्यादा परेशान रहते है।

लोग तो अपनी दवाइयों को साथ ही लेकर चलते है। जब भी बी’मा’रि’यों से पीछा नही मिलता हैं। न’बी के जमाने मे कोई भी सहा’बी कभी वै’ध ओर ह’की’म के पास गया हो। हम आपको एक बार की रिवायत बताते है कि एक बार एक ह’की’म प्यारे न’बी स’ल्लाहु अलै’हि वस’ल्लम के शहर में आया । इसलिए कि वहाँ जाकर किसी की बीमा’री को पूरा कर सकू ,पैसे कमा सकू। लेकिन उस हकीम के पास कोई भी इ’लाज क’राने नही आया। दिन गुजरता गया।

वो परेशान हो गया। वो हमारे आ’का सल्ला’हु अ’लैहि वस्सलम की बा’रगाह में दाखिल हुआ कहने लगा हु’जूर आप मुझे भी वो नु’स्खा बताइए जिससे कभी बी’मारी ही न हो।यह बात सुनकर हमारे प्यारे प्यारे आका, दोनो जहाँ के सरदार , जिस पर नबी की उम्मत निसार जाए अर्ज किया जब भी दस्त’रख्वा’न पर बैठो पेट जैसे ही भरने वाला हो उससे पहले उठ जाओ। यानी कि अपने पेट मे जितना आ सकता हो उससे कम ही खाना खाओ इससे सेहत भी बनी रहेगी।

मौटापा भी नही होगा और बी’मा’रियों से भी आज़ाद रहेंगे । इसके अलावा प्यारे न’बी सल्ला’हु अ’लैहि वस्स’लम ने सो’ने का त’रीका भी बताया । हमारे आ’का ने किसी भी शख्स को कैसे रहना है, कैसे बोलना है और किस तरह जिंदगी गुजारनी है, हर तरीके को बताया है । कम खा’ना चाहिए और सुन्न’तों पर चलना चाहिए यही नु’स्खा करने पर स’हाबी कभी भी बी’मार नही पड़ते है।

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