तनवीर उल हसन के पास नहीं थे बैट खरीदने के पैसे बन गए बॉलर ,बने रणजी के सुपर स्टार खिलाड़ी

जिस इंसान के पास बैट खरीदने के पैसे नही थे उन्होंने कर दिखाया एक ऐसा काम जिनको की उनका शहर करता है सलाम। अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या आप क्रिकेट खेलने का ख्वाब छोड़ देंगे? या फिर आप ऐसा करेंगे जैसा कि धौलपुर के एक मुस्लिम नोजवान युवक तनवीर उल हक ने किया है। ऐसा जज्बा किसी का नही होगा। जिन्होंने ऐसी मेहनत कर दिखाई की दुनिया दीवानी हो गई।

ये कभी मेकेनिक थे तो कभी न्यूज़पेपर बेचा करते थे। तनवीर ने बैट छोड़कर गेंद का दामन थाम लिया। तनवीर की जो कहानी शुरू हुई । उनकी किस्मत ने उसको गु’म’ ना’मी के अंधेरो से निकाल दिया। तनवीर को फ्रंट पेज पर ला खड़ा किया। तनवीर ने 10 मैचों में 51 विकेट लिए। किसी एक सीजन में सबसे ज्यादा विकेट का रिकॉर्ड हैं। दिल्ली से 280 किलोमीटर दूर राजस्थान का धौलपुर शहर, शहर के एक छोर पर शांत बहती चम्बल के सीने में ना जाने कितनी कहानियां अन- करीब हैं।

इन्ही बीहड़ो के करीब, शहर के शांत गलियारों में एक खुशनुमा दास्तान यह के लोगो मे बोल रही हैं। तनवीर उल हक धौलपुर का लोकल रॉकस्टार हुआ करता था। आज वो राजस्थान का उभरता हुआ एक क्रिकेट सितारा हैं। राजस्थान के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले एक खिलाड़ी है। मौजूदा रणजी सीजन में क्वाटर फाइनल तक पहुँचने की वजह बाएं हाथ के मीडियम तेज गेंदबाज तनवीर ही हैं।

जिन्होंने सीजन में 51 विकेट लेकर राजस्थान के लिए नया रिकॉर्ड बना डाला। तनवीर की इस कामयाबी में उसके अम्मी और पापा का नाम प्रसिद्ध कर दिया। उनके पिताजी पेशे से दर्जी है। उनकी जिंदगी आसान नही थी, उनकी जेब खाली थी और बेटे को क्रिकेट में डालना मुश्किल था। उनके पापा का कहना है कि खाने के लिए पैसे नही थे। उनका कर्म और तिवारी जी की मेहरबानी है। जिनका नाम सुमेन्द्र तिवा री है। सुमेन्द्र तिवारी की मेहरबानी है, कि उन्होंने अपने बच्चे की तरह इसको पाला। इसका सब तरफ से स्पोर्ट किया और पैसे खर्च किए।

हम तो इस लायक नही थे, जो इसको यहां तक पंहुचा देते। ये सब उनका कर्म हैं। तनवीर ने कहा कि मैं जब यहां आया था तो अब्बा का लोवर और टी शर्ट पहन कर आया था। सर ने मुझे बोला की ये क्या कपड़े पहने हुए है, लेकिन मैंने कुछ नही बोला। सर मेरी फीलिंग्स समझ गए। सर ने बोला कपड़े नही है, क्या नहीं है बता। सर मुझे उनके घर ले गए। सर ने मुझे जूते वगैरह सब दिलवाया। मैं ये कभी भी नही भूलूंगा। जिनका ये जिक्र कर रहे है, वो है राजस्थान के पूर्व कोच सुमेन्द्र तिवारी ।

सुमेन्द्र का कहना है कि तनवीर को पहले दिन देखा तो मुझे लगा कि ये लड़का खेलेगा। मुझे इस में पहले दिन ही कुछ दिख गया था। तो पहले दिन से ही मैंने मेहनत करना चालू कर दिया। सुमेन्द्र ने तनवीर के हुनर और फिटनेस को निखारा। तनवीर जल्द ही राजस्थान के जूनियर टीम में दिखने लगे। लेकिन दो वक्त की रोटी अभी भी चुनौती थी। तनवीर ने कहा कि मेरे दिन बहुत ही कठिनाइयों वाले दिन थे। मैं अखबार बेचता था, गाड़ी सही करने जाता था, काम करता था, ठेला भी लगाता था कपड़ो का।

लेकिन उनका कहना है कि मैं कभी भी उन दिनों को याद नही करना चाहता। वो मेरी मेमोरी ही रह जाती की मेरे दिन थे वो कठिनाई के। एक वक्त ऐसा आया कि तनवीर को लगा कि क्रिकेट को छोड़ दिया जाए, लेकिन उनके कोच ने उन्हें हिम्मत दिलाई और उनको संभाला। तनवीर की मेहनत रंग लाई। 2015 में राजस्थान की रणजी टीम में जगह मिली। एक न एक दिन जरूर मेहनत वालो की रंग निखरती है। थोड़ा लेट ही सही लेकिन अपनी मेहनत पर डटे रहो। वक्त सबका आता है। इस साल तनवीर ने रणजी 10 मैचों में 51 विकेट लिए।

उन्होंने एक विकेट के लिए लगभग 18. 52 रन खर्चे और उन्होंने हर गेंद पर विकेट चटकाया। इनके आदर्श जहीर खान और जेम्स एंडरसन है। तनवीर ने इनको टीवी पर देखकर बहुत कुछ सीखा हैं। तनवीर का कहना है कि जहीर से आगे बढ़ने की में सोचता था। उनके वीडियो इंस्ट्राग्राम और यूट्यूब पर देखता था। उनकी बोलिंग देखकर उसको करने की कोशिश करता था। उनको फॉलो करता था। तनवीर ने कहा कि मेरे बाद में जेम्स से मिलते जुलते एक्शन थे। उन्होंने फिर जेम्स को फॉलो करना शुरू किया। तनवीर का अगला लक्ष्य टी 20 में सफल होना है।

फिलहाल वो अपने कोच के साथ मिस्ट्री बॉल पर काम कर रहे हैं। कोच ने कहा कि तनवीर के पास ऐसी खूबी है कि बल्लेबाज भी उसे पढ़ नही सकता। अपने शहर धौलपुर में तनवीर एक स्टार है। इनको देखने हजारो दर्शक आते हैं। नामी क्रिकेटर भी चीफ गेस्ट बनते हैं। लेकिन लोगो की आंखों का तारा तो सिर्फ तनवीर उल हक हैं। तनवीर को भरोसा है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी। वो एक दिन भारतीय बोलिंग मशीन बनने तक का सफर जरूर पूरा करेंगे।

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