‘सद्दाम हुसैन ने अपने 26 लीटर खून से लिखवाई थी कुरआन’

सद्दाम हुसैन को बड़े बड़े महल बनाने के अलावा बडी बडी मस्जिदे बनवाने का शोक था। इसी तरह की म’स्जि’द उन्होंने मध्य ब’गदा’द में बनवाई थी। जिसे उम्म अल मारिक नाम।दिया गया था। इसका खास तौर से साल 2001 में सद्दाम हुसैन की सला’गिरह के लिए बनवाया गया था।

खास बात यह थी कि इसकी मीनार स्कड मि’साइल की शक्ल की थी। यह वही मि’सा’इल थी जिन्हें सद्दा’म हु’सैन ने खा ड़ी यु’द्ध के दौरान इ’स्राइ’ल पर दग्वाय था। सद्दाम हुसैन की जीवनी लिखने वाली कॉन कफलीन लिखते है कि सद्दा’म की बनवा’ई एक म’स्जि’द\

में सद्दाम के खून से लिखी गई एक कु’रान रखी हुई है।उंसके सभी 605 पन्नों को लोगो को दिखाने के लिए एक शी’शे के केस में रखा गया है। म’स्जिद के मौ’लवी का कहना है कि इसके लिए सद्दा’म ने तीन सालों तक अपना 26 लीटर खू’न दिया था।

स’द्दाम हु’सैन द पॉलिटि’क्स ऑफ रिवेंज लिखने वाले सेद अबूरीश का मानना है कि सद्दाम की बड़ी बड़ी इ’मारत और म’स्जिद बनवाने की वजह तिकरित में बि’ताया। जहां उनके परि’वार के लिए उ नके लिए एक जूता तक खरी’दने के लिए पैसे नही थे। स’द्दाम हुसै’न सुबह 3 बजे स्वी’मिंग पु’ल के लिए उ’ठ जाया करते थे।

सद्दा’म पर एकऔर कि’ताब लिखने वाले आम’जिया बरम लिखते है कि यह देखते हुए कि सद्दा’म के शासन के कई दु’श्म’नों को थै’लि’यम के जहर से मारा गया था। इसके बाद हफ्ते मे दो बार उनके बग’दा’द के महल के ताजी मछ’ली, के केक’ड़े, झिं’ग और बक’रे और मु’र्गे की गो’श्त की खेप भिजवाई जाती थी ।

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