अमरोहा से निकल कोलकाता में टेंट में रहकर कैसे टीम इंडिया तक पहुंचे मोहम्मद शमी?

क्रिकेट की दुनिया मे ऐसे कई क्रिकेटर हैं जिन्होंने कई तरह के परे;शा’नी हो भी देखा है। एक ऐसा भी खिलाडी जो अगर दो हफ्ते भी ले’ट हो जाता था तो कभी सचिन के साथ भी नही खेल पता था। एक ऐसा ख़िला’डी जो सिर्फ बिरया’नी के लिए छक्के भी छुड़वा देता था। हम बात करेंगे कि भारत के लिए 350 से ज्यादा

विकेट लेने वाले गेंदबाज मोह’म्मद शमी के बारे में।6 नवम्बर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन में अपने डेब्यू टेस्ट मैच में शमी ने पहलीं पारी में चार और दूसरी पारी में पांच विकेट च’टकाए भी थे। शमी ने अपनी कड़ी मेह’नत के दम पर पिता के लगन की वजह से उन्होंने सहसपुर से कैसे टीम इंडिया का सफर भी तय किया है

mohammad shami

पहले तो शमी मुरादाबा के एक क्लब में आए लेकिन शमी को पता था कि यूपी से इंटरनेशनल तक पहुँचने में भी काफी ज्यादा अड़चने भी आएगी। इसके बाद शमी के पिता ने अपने 16 साल के बेटे को क कोलकाता भी रवाना कर दिया।

कोलकाता के ईडन गार्डन्स से एक किलोमीटर दूर डलहौजी क्लब था। इनसे क्लब में सिर्फ प्रैक्टिस पिच होती थी। आधी मिट्टी और आधी सीमेंट में बनी थी। मैदान के बाहर एक टेंट भी था। शमी उस टेंट में रहते, खाते और उस प्रै’क्टिस पिच पर अपनी गेंदबाजी का अभ्यास भी करेंगे।

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एक रोज डल’हौजी एथले’टिक क्लब के सुमेन चक्रवर्ती ने टाउन हॉल के कोच देवबर्ता दास को फोन भी लगाया। चक्रवतरी ने दास को फोन लगाया और कहा है कि जल्दी राज’स्थान कल्बे आइये। एक नया गेंदबाज दिखाना भी है। एक ही’रा है नही तो वह भी खो जाएगा।

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