असम की जाबेदा की द’र्द भरी दास्तान,15 दस्तावेज़ देकर भी साबित नहीं कर पाई भारतीय ना’गरिकता, क़ानूनी लड़ाई में..

ना’गरि’कता का’नून के खिलाफ देशभर में विरो’ध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है । बता दे, असम में एन’आरसी ला’गू हुआ उसके बाद वहां के नाग’रिकों को ना’ग रिक’ता साबित करने के लिए डॉक्यु’मेंट्स दिखाने को कहा गया। असम की एन आ’रसी होने के बाद 19 लाख लोग इस बाहर हुए ,इसमें 12 लाख मुस्लि’म भी है । असम में बाहर हुए नाग’रिकों की कहानी अब बाहर आ रही है।

इसी के साथ असम की एक खबर हम आपको बताने जा रहे है। यह खबर एनडीटीवी के प्राइम टाइम में भी बताई गई थी।असम की एक महिला जिसने अपनी और अपने पति की नागरि’कता सा’बित करने के लिए लगभग 15 तरह के दस्ता’वेज पेश किए है। फिर भी वो अपनी नाग’रिकता सा’बित करने में हार गई है।अब वो जिंदगी से हारती हुई दिख रही है। इनके पति बीमार रहते है और जुबैदा अकेली घर मे कमाने वाली है।

एनडीटीवी के अनुसार जुबैदा की तीन बेटियां है, जिसमें से एक ला’पता है । सबसे छोटी बेटी कक्षा 5 में पढ़ती है। पति का कहना है कि सारा पैसा खर्च हो गया है। इनका एक खेत भी है, जो 3 बीघा का था उसे 1लाख में बेच दिया । वह अब दिहाड़ी के 300 सौ रुपए कमाती है। ट्रिब्यू’नल द्वारा विदे’शी घो’षित की गई जु’बैदा और पति ड’रे हुए है उनके कहना है कि हमारी नाग’रिकता चली गई है।

जुबैदा गुवाहाटी से लगभग 100 किलोमीटर दूर बक्सा जिले में रहती है। जुबैदा अपनी बेटी अस्मिना को लेकर ज्यादा परेशा’न है। इनकी बेटी को कई बार भूखे ही सोना पड़ता है। जुबैदा का कहना है कि मैं खुद के लिए उम्मीद खो चुकी हूं। जुबैदा अपनी आंसुओ से भरी आंख के साथ कहती है कि मेरे पास जो था,वो सब खर्च हो गया है। अब मेरे पास कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कोई संसाधन नही बचा है।

जन्म प्रमाण पत्र की जगह पर उन्होंने गांव के प्रधान से एक प्रमा’ण पत्र बनवाया था। वो भी उन्होंने पेश किया था। लेकिन इसे ना तो न्याया’धि’करण ने माना और ना ही कोर्ट ने माना है। जुबैदा के पास 3 बीघा जमीन थी उसे भी उन्होंने केस लड़ने के लिए1 लाख रुपए मे बेच दिया था। अब वो रो’जाना 300 रुपए कमाती है।

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