86 साल बाद पढ़ी गई जुमे की नमाज़, पढ़ा गए दुरुद-ओ-सलाम, दुनिया भर के मुस्लिमों ने कहा ..

सो’शल मी’डि’या पर माने तो तु’र्की के इ’तिहा’स में ख़ि’लाफ़’ते उ’स्मानि’या का फिर से दौर शुरू होने की ओर पहला कदम बताया जा रहा है। तुर्की के को’र्ट फैसले के आने के बाद 24 जुलाई शुक्रवार को सोफि’या म’स्जिद में नमाज अदा की गई। तुर्की के इतिहास में ये दिन बहुत याद रख जाएगा। ये बेहद खास और मुबारक दिन सिर्फ तुर्की ही नही बल्कि दुनियाभर के मु’सल’मानों के लिए खुशी की बात है।

तुर्की के मुस्लि’म बड़ी तादात में नजर आए और सोशल डि’स्टेंडिंग का भी पालन किया। सभी लोगो ने न’माज के बाद तुर्की की फतेह के लिए अल्ला’ह का शुक्र अदा किया। नमा’ज के बाद सभी न’माजियों ने अल्लाह का शुक्र अदा किया। यहां पर पहली बार नमा’ज अदा की गई 86 बाद आए इस फैसले से सभी लोगो मे खुशी जाहिर हो रही है। बता दे कि गुरुवार को इस्तंबूल के गवर्नर अली येरलिकया ने कहा है कि हम जानते है कि यह हमारे मुस्लि’म भाइयों की एक बड़ी आरजू और दिली तम्मन्ना पूरी हुई है।

turkey worshippers recites duroodo salaam

हगिया सोफि’या सिर्फ तुर्की के लोगो के लिए ही नही बल्कि दुनियाभर के हर एक मुसल’मा’नों के दिल के करीब है। इन्होंने आगे बताया है किसभी को इबादत के लिए पर्याप्त समय देने के लिए, मस्जिद सुबह 10 बजे जायरीनों के लिए अपने दरवाजे खोलेगी और अगली सुबह तक खुली रहेगी। आगे बताया है कि मस्जिद के अंदर इबादत करने के लिए 5 स्थान है जिनमे से 2 महिलाओं के लिए है।

जहां पर इबादत कर सके। सोशल डिस्टेंडिं’ग का भी पालन किया जा सके और इबाद’त की जा सके। सोफिया के फैसले के आने के बाद तुर्की के खिलाफ बहुत से देशो ने आलोचना भी की है। तुर्की के राष्ट्रपति ने अपने एक बयान में भी कहा है कि मस्जि’दे अल अक्सा भी इजरा’इल के गि’रफ्त से मु’क्त होगी। ये पहला कदम है।

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इनके समर्थन में पाकिस्तान ओर मलेशिया ने भी साथ दिया है और इसे ख़िलाफ़’ते उस्मा’निया होने का करारा दिया है। तुकी का इतिहास काफी समय पुराना है। पहले इसे म’स्जिद , चर्च और फिर मस्जिद में तब्दील किया गया है। तु’र्की के कोर्ट ने 1934 कैबिनेट फैसले को रद्द करते हुए बोले है कि सोफिया अब म्यूजि’यम नही रहेगा इसे अब म’स्जिद का दर्जा दिया जाएगा।

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