अरब देश के वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास, खोजा रोमन एम्पायर का रिश्ता और ..

ऐसे तो वैज्ञा’निक हर तरह के कई चीजों को खोज करते रहते है। उनका काम भी यही होता है कि वो पुरा’नी से पु’रानी और नई से नई किसी भी ची’ज कि खोज करके पता के सकें।हाल ही में यूए’ई के वैज्ञानि’कों ने देश कि आधिका’रिक समा’चार एजें’सी डब्लू’ई ए एम के मुताबिक यूएई के वै’ज्ञानिकों ने वि’लुप्त प्रजा’तियों के

जी’नोम का अनु’क्रम करने के लिए मध्य पूर्व में रोमन साम्रा’ज्य के प्रभाव के बारे में जानने के लिए प्रा’चीन ता ड के बी’जों को उपयोग में किया है। न्यूयार्क विश्व’विद्यालय अबू धा’भी के वै’ज्ञानिक दक्षि’णी लवेंट क्षेत्र से बीज अं’कुरित करने मै काम’याब रहे है। जो एक का’र्बन डेटिंग के माध्यम से लगभग दो हजार साल

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पुराने भी थे। इन बीजों का उपयोग जीनो’म अनुक’रण के लिए किया जाता था। जिसमे इस बात को पता चला था कि ता’ड के पे’ड़ों के विलुप्त होने वाले के बाद भी वो किस तरह से विकसित किया गया है।बता दे कि चोथी शताब्दी ईसा पूर्व और दूसरी शता’ब्दी सिई के बीच पूर्वी भूम’ध्यसागरय

में जुड़ें न ताड के पेड़ ने आज फी’निक्स थियो’फ्रास्टी सहित अन्य प्रजा’तियों के जीने के बड़ते स्तर को भी दिखा’ना शुरू कर दिया है। जो आज ग्रीस और तुर्की में भी बढ़ता है। नेशन ल एके’डमी ऑफ साइंस यूएस ए के प्रोसी’डिंग्स में प्रका’शित अध्य’यन के मु’ताबिक,

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फी’निक्स थियोग्र’स्ती कई जीन के स्तर के रोमन सा’म्राज्य कि भी तारीख है। बता दे कि अ’ध्ययन जी’व वि’ज्ञान के प्रोफेसर माईकल दी पुरुगन ने कहा है कि हम बहुत भाग्यशा’ली है। ता’ड के ख’जूर के लिए 2,000 से अधिक सालो तक रह सकते है।

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