तुम अपने अल्लाह की कौन कौनसी नेअमतों को झुठलाओगे, 125 साल बाद अजब गजब उल्लू, नारंगी आंखे और …

यह दुनिया चम’त्का’रों की दुनिया है। अक्सर हमारे सामने ऐसे कई तरह के दृ’श्य, प’शु प’क्षी रहते है। जो हमे हैरान कर जाते है। इन्हें हम कुद’रत का क’रिश्मा भी मन लेते है। मलेशि’या में भी कुद’रत नी’क बार फिर से क’रि’श्मा दिखा दिया है। मले’शिया ने एक बार फिर से लुप्त हो चुके उ’ल्लू को फिर से दुनिया के सामने ला दिया है।

मलेशिया में 125सालो पुराने उ’ल्लू को देखा गया है। जिसे देखकर हर किस श’ख्स में कोतु’हल भी म’चा हुआ है।इस उल्लू की गहरी ना’रंगी की आं’खों है। इसको देखा गया है। जीव वै’ज्ञानिकों ने कहा है कि यह उल्लू दुर्लभ प्रजाति से है,इसके संरक्षण की’ भी जरूरत है।बता दे कि इस उल्लू के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी भी नही है।

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इस दुर्ल’भ उ’ल्लू को मलेशि’या के वर्ष वन माउंट किना’बलु में पाया गया है। जीव वैज्ञानिकों के मुत’बिक उ’ल्लू राजा स्कोप प्रजा’ति से है। जीव वेज्ञानिको ने बताया है कि पर्या’वरण के लगातार बदलने की वजह से उ’ल्लू की प्रजा’ति को गहरा नुक’सा’न भी पहुँचा होगा।

डेली मेल की रिपो’र्ट के अनुसार इस प्रजा’ति के उ’ल्लू की पह’चान का’फी समय से की जा रही है। 2016 में इस उल्लू की त’लाश में एक टेक्नीशि’यन कि’गम ट्रां’किकलो ने काफी व’क्त मा’उंट किना”बलु के जं’गल के अं’दर भी बिताया था। लेकिन उनको काम’याबी नही मिली थी। जीव वैज्ञानि’कों के मुता’बिक लगातार

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बद’लते मौ’सम, व’नों की क’टाई और पो’म आय’ल उत्पा’दन की वजह से इन उ’ल्लुओं की प्र’जाति को का’फी बु’रा असर भी पड़ा होगा। सामान्यतया उ’ल्लू की आंखे’ पी’ले रंग की होती है लेकिन इस उ’ल्लू की आंखे नारं’गी रंग की है।

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