हरिद्वार में मीट बैन पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा- ‘यह मौलिक अधिकार का हनन, अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक का मुद्दा नहीं’

उत्तराखंड के ह’रिद्वार में कसा’ईखा’नों पर प्र’ति’बन्ध लगा दिया गया है। इस मामले को लेकर हाई को’र्ट में या’चिका दायर भी की गई है। इस पर फैसला सुनाते हुए हाइ कोर्ट ने अ’हम टिप्पणी भी की है। हा’ई को’र्ट ने कहा है कि देश मे जहाँ 70 प्रतिशत आबा’दी मां’सा’हारी भोज’न करती है। ऐसे में मां’स पर प्रतिबंध लगाना

नागरिको के मौ’लिक अधिका’रों से सम्बंदित भी है। कोर्ट ने इस बात को भी कहा है कि यह ब’हुसं’ख्यक बनाम अल्प’सं’ख्यक मु’द्दा न’ही है। अदालत ने याचिका कर्ता से एक सप्ताह में अपनी या’चिकाओं पर संसो’धन करने को भी कहा है क्योकि उनमें से किसी ने भी यह दली’ल नही दी कि इस तरह का प्र’ति’बन्ध

uttarakhand high court

किसी नागरिक के नि’जता के अधि’का’र का उ’ल्लं’घन भी करता है। अ’दालत ने इस बात की भी टिप्प’णी की है कि याचिका’ओ को पूरे मन से तैयार नही किया गया है, जो मौलि’कसंवै’धानिक मु’द्दों को चुनोती देने के लिए भी जरूरी है।बता दे कि हरिद्वार के कुछ निवा’सि’यों ने

या’चिका को दायर करते हुए आरो’प लगाया था कि ह’रिद्वार में कसा’ईखा’नों पर प्र’तिबं’ध लगाया जाए। यह अल्प’सं’ख्यक के साथ भेद’भाव भी है क्योकि जिलों के कई क्षेत्र ऐसे भी है जिनमे अधि’कांश मु’स्लि’म आबा’दी है। मार्च के महीने में उत्तराखंड ने हरिद्वार के सभी क्षे’त्रो को

uttarakhand high court

क’साई खा’नों मु’क्त घोषि’त भी कर दिया गया था। इसकेअलावा कसा’ईखा’नों के लिए जारी किए गए अ’नाप’त्ति प्रमा’ण प’त्र को भी र’द्द कर दिया गया था। हा’ईकोर्ट ने इसके दो याचि’काओं ने इसे दो आ’धारों परभी चुनोती दी गई थी।

Leave a Comment